भारत की बुनियादी ढांचे पर खर्च में भारी वृद्धि

भारत की बुनियादी ढांचे पर खर्च में भारी वृद्धि

 

भारत वित्त वर्ष 2024 और 2030 के बीच बुनियादी ढांचे पर करीब 143 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगा। यह रकम वित्त वर्ष 2017 से 2023 के बीच खर्च हुए 67 लाख करोड़ से दोगुने से भी अधिक है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि 143 लाख करोड़ में से 36.6 लाख करोड़ रुपये हरित निवेश पर खर्च होंगे, जो 2017-2023 में हुए खर्च से पांच गुना ज्यादा होगा। वित्त वर्ष 2031 तक भारत की जीडीपी औसतन 6.7 फीसदी की दर से बढ़ेगी और यह सबसे तेजी से विस्तार करने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था होगी।
यह खबर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है। बुनियादी ढांचे में निवेश देश की आर्थिक विकास और स्थिरता को बढ़ावा देगा। यह रोजगार पैदा करेगा और जीवन स्तर में सुधार करेगा।
हरित निवेश पर ध्यान देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा। भारत ने 2030 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 2005 के स्तर के 45% तक कम करने का लक्ष्य रखा है।
क्रिसिल की रिपोर्ट में उल्लिखित कुछ प्रमुख निवेश क्षेत्रों में शामिल हैं:
  • सड़क: भारत की सड़क नेटवर्क की लंबाई को 2030 तक दोगुना करने की योजना है।
  • बिजली: देश 2030 तक अपने बिजली उत्पादन में 50% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रखा है।
  • ई-वाहन: भारत 2030 तक कुल वाहन बिक्री में ई-वाहनों के हिस्से को 30% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
  • हाइड्रोजन: भारत हाइड्रोजन ऊर्जा के विकास में एक वैश्विक नेता बनने का लक्ष्य रखा है।
इन निवेशों से भारत को एक मजबूत और टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी।
यहां कुछ विशिष्ट लाभों पर एक नज़र है जो भारत को इन निवेशों से उम्मीद है:
  • आर्थिक विकास: बुनियादी ढांचे में निवेश रोजगार पैदा करेगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
  • जीवन स्तर में सुधार: बेहतर बुनियादी ढांचा लोगों के जीवन स्तर में सुधार करेगा।
  • जलवायु परिवर्तन से लड़ाई: हरित निवेश भारत को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।
कुल मिलाकर, भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश देश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है। यह भारत को एक मजबूत और टिकाऊ अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा।

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