भारत की प्रमुख नदियाँ, उनकी लम्बाई, उद्गम स्थल और नदी तंत्र

भारत की प्रमुख नदियाँ, उनकी लम्बाई, उद्गम स्थल और नदी तंत्र

 

मानव के इतिहास में नदियों का अत्यंत ही महत्व रहा है। नदियों का जल एक अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है जो कि अनेक मानवीय क्रियाकलापों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ नदियों को ‘माता’ का दर्जा दिया जाता है, भारत में नदियों को बहुत ही पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है।
आज के इस आर्टिकल में हम आपको भारत की नदियाँ, उनके उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियाँ, अपवाह तंत्र और उनके आर्थिक महत्त्व के बारे में बताएँगे।
भारत की नदियों के बारे में जानने से पहले जाने लेते हैं कि नदी किसे कहते हैं?
नदी किसे कहते हैं?
‘नदी वह भारी वेग से प्रवाहित जलधारा है जो किसी बड़े हिमनद या जलाशय आदि से निकलती है और एक निश्चित मार्ग में बहते हुए किसी झील या सागर में समाहित हो जाती है।’ नदियाँ प्रायः किसी हिमनद/ग्लेशियर, झील या बारिश के जल जैसे स्रोतों से जल प्राप्त करती हैं।
नदियाँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं – बारहमासी (हिमालय की नदियाँ) और मौसमी (प्रायद्वीपीय नदियाँ)।
बारहमासी (हिमालय की नदियाँ): बारहमासी नदियों (हिमालय की नदियाँ) में जल का स्रोत मुख्यतः ग्लेशियर या हिमनद होते हैं। ग्लेशियर के पिघलने से इन नदियों में सदैव जल की मात्रा बनी रहती है और वर्षा ऋतु में इनमें जल का स्तर काफी बढ़ जाता है और नदियों में अक्सर बाढ़ आ जाती है।
मौसमी (प्रायद्वीपीय नदियाँ): प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी होती हैं। उनमें जल का स्रोत सामान्यतः वर्षा का जल होता है। गर्मी के मौसम में इन नदियों का जल घटकर छोटी-छोटी धाराओं में बहने लगता है। इस प्रकार की नदियाँ प्रायः गर्मी में मौसम में सूख जाती हैं।
हिमालय की नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों में अंतर हिमालय की नदियाँ
प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ
हिमालय की नदियों की लम्बाई अधिक होती है और ये गहरी होती हैं।
प्रायद्वीपीय भारत की नदियों की लम्बाई अपेक्षाकृत कम होती है और ये कम गहरी होती हैं।
हिमालय की नदियाँ बारहमासी होती हैं।
प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी होती हैं।
ये नदियाँ काफी बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं। विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा ‘सुंदरवन’ डेल्टा का निर्माण गंगा व ब्रह्मपुत्र नदियाँ करती हैं।
ये नदियाँ छोटे डेल्टा व ज्वारमुख का निर्माण करती हैं।
हिमालय की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों में गिरती हैं।
हिमालय की नदियाँ नवीन हैं।
प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ प्रौढ़ावस्था में हैं।
भारत की नदियाँ, उनके उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियाँ आइए जानते हैं भारत की नदियाँ, उनके उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियाँ, अपवाह तंत्र और उनके आर्थिक महत्त्व के बारे में।
अपवाह तंत्र क्या होता है? नदी द्वारा उसके बहाव का एक दिशा तंत्र होता है जिसे अपवाह तंत्र कहते हैं। भारत में लगभग 4000 छोटी बड़ी नदियाँ हैं। इन्हें इनके अपवाह तंत्र के अनुसार मुख्यतः दो भागों में बांटा जा सकता है।
हिमालय अपवाह तंत्र: हिमालय अपवाह तंत्र के अंतर्गत हिमालय से निकलने वाली नदियाँ आती हैं। जो की हिमालय में स्थित ग्लेशियरों से निकलती हैं l
सिंधु नदी तन्त्र –

सिंधु नदी तंत्र भारत और पाकिस्तान की एक महत्वपूर्ण नदी प्रणाली है। यह नदी प्रणाली भारत के जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा राज्यों से होकर बहती है। सिंधु नदी तंत्र में सिंधु के साथ उसकी सहायक नदियाँ सतलज, झेलम, रावी, व्यास, चिनाव, काबुल, गोमल, टोंस, श्योक, गिलगिट, हुंजा, नुब्रा, शिगर, गस्तिंग और द्रास शामिल हैं।
सिंधु नदी तंत्र का आर्थिक महत्व बहुत अधिक है। यह नदी प्रणाली भारत और पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है। यह नदी प्रणाली कृषि, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन, मत्स्य पालन, जल परिवहन आदि के लिए महत्वपूर्ण है। सिंधु नदी तंत्र भारत और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपत्ति भी है।
आपने सिंधु नदी तंत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आपने सिंधु नदी के उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियों और आर्थिक महत्व के बारे में बताया है। आपकी जानकारी बहुत ही उपयोगी और जानकारीपूर्ण है।
‘सिन्धु नदी हिमालय के मानसरोवर के निकट स्थित समोख्याब हिमनद में निकलती है l
  • यह नदी पश्चिम की ओर बहती है और भारत के लद्धाख राज्य में प्रवेश करती है l
  • भारत और पाकिस्तान के बीच सिन्धु जल समझौते (1960) के अनुसार भारत, सिन्धु और उसकी सहायक नदियों के जल का केवल 20% जल ही उपयोग कर सकता है l
  • सिन्धु नदी के जल का प्रयोग हम पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में सिंचाई कार्यो के लिए करते है l
सिन्धु में बाए तट से आकर मिलने वाली नदियों का प्रमुख क्रम इस प्रकार है – झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज 
  • ‘सिन्धु नदी तंत्र में झेलम एकमात्र ऐसी नदी है जो जम्मू कश्मीर (बेरीनाग के समीप शेषनाग झील से ) से निकलती है’ और वुलर झील में मिल जाती है यह नदी लगभग भारत व पाकिस्तान की सीमा के समान्तर बहती है l जबकि अन्य तीन नदियाँ – चिनाब, रावी और व्यास हिमाचल प्रदेश से निकलती है l
  • चेनाब, सिन्धु की सबसे लम्बी सहायक नदी है इसे हिमाचल में चद्रभागा कहा जाता है l
  • व्यास, सतलज की सहायक नदी है यह एक ऐसी नदी है ‘जो पाकिस्तान में प्रवेश न करके कपूरथला के पास हरिके नमक स्थान पर सतलज में मिल जाती है l’
  • सिन्धु नदी तंत्र की 5 प्रमुख नदियाँ जो पंजाब में बहती है उन्हें पंचनद कहा जाता है l
  • ये पांचो नदियाँ पाकिस्तान के मिठानकोट के पास सिन्धु नदी में मिल जाती है इसके पश्चात सिन्धु नदी दक्षिण की ओर बहती है और अंत में कराची से पूर्व की ओर अरब सागर में गिर जाती है l
  • सिन्धु नदी का कुछ भाग जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब 

    में स्थित है जबकि शेष भाग पाकिस्तान में स्थित है l

गंगा नदी तन्त्र –

गंगा नदी भारत की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण नदी है। यह नदी भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से होकर बहती है।
गंगा नदी तंत्र का आर्थिक महत्व बहुत अधिक है। यह नदी प्रणाली भारत के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है। यह नदी प्रणाली कृषि, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन, मत्स्य पालन, जल परिवहन आदि के लिए महत्वपूर्ण है। गंगा नदी तंत्र भारत की संस्कृति और धर्म का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आपने गंगा नदी तंत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आपने गंगा नदी के उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियों और आर्थिक महत्व के बारे में बताया है। आपकी जानकारी बहुत ही उपयोगी और जानकारीपूर्ण है।
यहाँ गंगा नदी तंत्र के बारे में कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है:
  • गंगा नदी की कुल लंबाई 2,525 किलोमीटर है।
  • गंगा नदी की जलग्रहण क्षेत्रफल 1,000,000 वर्ग किलोमीटर है।
  • गंगा नदी की सर्वाधिक सहायक नदी यमुना है।
  • गंगा नदी के मुहाने पर सुंदरवन डेल्टा स्थित है, जो विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।
  • गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से होता है यहाँ यह ‘भागीरथी’ के नाम से निकलती है l
  • गंगा की दो शीर्ष धराए अलकनंदा और भागीरथी है l
  • अलकनंदा नदी सतोपंथ हिमानी से निकलती है और देवप्रयाग में भागीरथी नदी से मिलती है l
  • अलकनंदा नदी का निर्माण दो धाराओ के मिलने से होता है – धौली गंगा और विष्णु गंगा l
  • ये दोनों नदियाँ विष्णु प्रयाग में मिलती है और अलकनंदा नदी का निर्माण करती है l
  • देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा नदी मिलने के बाद दोनों की संयुक्त धारा ‘गंगा’ कहलाती है l
  • पिंडार नदी कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी में मिलती है और मन्दाकिनी नदी रूद्रप्रयाग में अलकनंदा में मिल जाती है l
  • हरिद्वार के पास गंगा नदी पर्वतीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है l
  • इसके बाद इसमें कई सहायक नदियाँ आकर मिल जाती है l
  • गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना है जो उत्तरखंड के बन्दरपूँछ के पश्चमी ढाल पर स्थित यमुनोत्री हिमनद से निकलती है और गंगा नदी के दाए किनारे के समान्तर बहते हुए प्रयागराज के पास गंगा नदी में जाकर मिल जाती है l
  • प्रायद्वीपीय पठार से निकलकर दक्षिण की ओर से आकर गंगा में मिलने वाली नदियाँ सोन, बेतवा व चम्बल है l
  • चम्बल और बेतवा नदी गंगा नदी में सीधे न मिलकर यमुना में अपना जल गिराती है l
  • टोंस नदी इलाहाबाद के पास गंगा में मिल जाती है और सोन नदी पटना के समीप गंगा नदी में मिल जाती है l
  • गोमती नदी गंगा की एकमात्र सहायक नदी है जो मैदानी क्षेत्र से निकलती है इसका उद्गम उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के मैदान में फुलहर झील से होता है l
  • घाघरा, गंडक व कोसी नेपाल से भारत में प्रवेश करती है और बिहार में गंगा में मिल जाती है l
  • गंडक नदी को नेपाल में नारायणी या शालिग्राम कहते है l
  • इन नदियों के कारण ही प्रत्येक वर्ष उत्तरी भारत में कुछ भागो में बाढ़ आती है और भारी जान माल का नुकसान होता है l लेकिन दूसरी और ये नदियाँ कृषि हेतु उपजाऊ भूमि भी प्रदान करती है l
  • महानंदा नदी गंगा की सबसे पूर्वी व अंतिम सहायक नदी है l यह पश्चिम बंगाल में दार्जलिंग की पहाड़ी से निकलती है
गंगा में बाए तट से आकर मिलने वाली नदियाँ: रामगंगा, गोमती, घाघरा (तीनो उत्तर प्रदेश में प्रवाहित), गंडक, कोसी (दोनों बिहार में प्रवाहित), महानंदा (बिहार व पश्चिम बंगाल की सीमा पर ) l
  • गंगा में दाए तट से आकर मिलने वाली नदियाँ: चम्बल, सिंध, बेतवा, केन, सोन, टोंस l
  • सहायक नदियों से जल प्राप्त करके गंगा पूर्व दिशा में बहने लगती है और पश्चिम बंगाल के फरक्का तक बहती है l
  • यहाँ यह नदी दो भागो में बंट जाती है – भागीरथी और हुबली (हुबली नदी विश्व की सबसे विश्वासघाती नदी है ) l
  • इसके पश्चात् यह दक्षिण की ओर बहती है और बाद में बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है जबकि इसकी मुख्य धारा (भागीरथी) दक्षिण की ओर बहते हुए बांग्लादेश में प्रवेश कर जाती है यहाँ इसे ‘पद्मा’ के नाम से जाना जाता है l
  • यही पर पावना से पूर्व बोलुन्ड़ो के पास ब्रह्मपुत्र नदी, जो कि बांग्लादेश में ‘जमुना’ के नाम से जानी जाती है, इसमें मिल जाती है l
  • बंगाल की खाड़ी में गिरने से पूर्व गंगा व ब्रह्मपुत्र की संयुक्त धारा ‘मेघना’ के नाम से जानी जाती है l
  • समुद्र में गिरने से पूर्व ये कई छोटी छोटी धाराओं में बंट जाती है और बंगाल की खाड़ी के समीप डेल्टा का निर्माण करती है l यहाँ पर गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी द्वारा ‘विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा जिसे ‘सुंदरवन डेल्टा’ कहते है,’ निर्मित है l
  • सुंदरवन डेल्टा का विस्तार हुबली नदी से लेकर मेघना नदी तक है और अपनी उपजाऊ भूमि के कारण यह वनों से ढका हुआ है l
  • यहाँ पर सुन्दरी नामक वृक्ष पाए जाते है इसलिए इसका नाम सुंदरवन पड़ा l यहाँ पर रॉयल बंगाल टाइगर भी पाए जाते है l;
  • अंबाला नगर, सिन्धु व गंगा नदी तंत्रों के बीच जल विभाजक पर स्थित है l
  • यमुना नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: टोंस, हिंडोन, शारदा, कुंता, गिरी, हनुमान गंगा।
  • यमुना नदी में दाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: चंबल, बेतवा, केन, सिंध।
  • चम्बल की सहायक नदियाँ: बनास, क्षिप्रा, बामनी, काली, सिंध, पार्वती, ब्राह्मणी l
ब्रह्मपुत्र नदी तन्त्र –

ब्रह्मपुत्र नदी भारत, तिब्बत और बांग्लादेश की एक प्रमुख नदी है। यह नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय राज्यों से होकर बहती है।
ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का आर्थिक महत्व बहुत अधिक है। यह नदी प्रणाली भारत और बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है। यह नदी प्रणाली कृषि, सिंचाई, ऊर्जा उत्पादन, मत्स्य पालन, जल परिवहन आदि के लिए महत्वपूर्ण है। ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपत्ति भी है।
आपने ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आपने ब्रह्मपुत्र नदी के उद्गम स्थल, लम्बाई, सहायक नदियों और आर्थिक महत्व के बारे में बताया है। आपकी जानकारी बहुत ही उपयोगी और जानकारीपूर्ण है।
यहाँ ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र के बारे में कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है:
  • ब्रह्मपुत्र नदी की कुल लंबाई 2,900 किलोमीटर है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी की जलग्रहण क्षेत्रफल 700,000 वर्ग किलोमीटर है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी की सर्वाधिक सहायक नदी सियांग है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी के मुहाने पर सुंदरवन डेल्टा स्थित है, जो विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम तिब्बत के मानसरोवर के निकट चेमयुंगडुंग हिमनद से होता है l
  • तिब्बत में इसे सांग्पो के नाम से जाना जाता है l
  • ये हिमालय के सामानांतर पूर्व दिशा में बहती है l इ
  • सका अपवाह तंत्र चीन, भारत व बांग्लादेश में विस्तृत है l
  • भारत के नामचा बरवा पर्वत शिखर के पास पहुचकर U आकार का मोड़ लेकर अरुणाचल प्रदेश में गार्ज के माध्यम से प्रवेश करती है और अरुणाचल प्रदेश में यह ‘दिहांग’ के नाम जानी जाती है l
  • इसके पश्चात् दिबांग, लोहित व केनुला आदि सहायक नदियाँ इसमें मिलती है और तब यह असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है l
  • असम में इसमें कई नदियाँ जैसे मानस, धनश्री, शुभान्श्री, भरेली आदि आकर मिल जाती है l
  • असम में ब्रह्मपुत्र नदी कई धाराओं में बहती है और घुमावदार जलमार्ग बनाती है l
  • यहाँ ब्रह्मपुत्र नदी कई द्वीपों का निर्माण करती है जिसमे से ‘माजुली द्वीप’ विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है [मंजुली भारत का एकमात्र नदी जिला है ] l
  • असम से यह सादिया से धुवरी तक रैम्प घाटी में प्रवाहित होती है l
  • धुवरी तट से यह पश्चिम की ओर बहती है और आगे गोलपारा से यह बांग्लादेश में प्रवेश करती है जहाँ इसे ‘जमुना’ के नाम से जाना जाता है l
  • इसके पश्चात् इसमें ‘मेघना नदी’ जो मणिपुर की पहाड़ी से निकलती है और बाराक कहलाती है, भैरवबाज़ार के समीप ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है l
  • अंत में यह बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है l
  • इसकी कुल लम्बाई लगभग 2900 किमी है l
  • ब्रह्मपुत्र नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: दिबांग, लोहित, धनश्री, शुभांशी, मानस, सनकोष, कामेंग l
  • ब्रह्मपुत्र नदी में दाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: जियाबरेली, मानस, रेंडर, तीस्ता।
प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र –

प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालय की नदियों की तुलना में पुरानी है व प्रौंढ अवस्था में है l बहते-बहते ये नदियाँ अपने तल तक पहुचं गयी है इसलिए इनका प्रवाह मंद हो गया है और ये चौड़ी हो गयी है l अब इनके मार्ग घुमावदार न होकर निश्चित हो गये है l प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र में दो प्रकार की नदियाँ है – बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली और अरब सागर में गिरने वाली l
  • बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ: महानदी, गोदावरी, कृष्णा, ब्राह्मणी, कावेरी, पेन्नार , वैगई, दामोदर, स्वर्णरेखा, वैतरिणी l
महानदी
  • महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के रायपुर के समीप धमतरी जिले में स्थित सिंहावा से होता है, और यह पूर्व व दक्षिण पूर्व की और बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है l
  • यह नदी 53% मध्य प्रदेश में व 47% छत्तीसगढ़ में और ओडिशा में बहती है l
  • सागर में गिरने से पूर्व महानदी कटक के समीप महत्वपूर्ण डेल्टा बनाती है l
  • महानदी पर हीराकुंड, नाराज़, गंगरेल व रुद्री जैसी बहुउद्देशीय परियोजना है l
  • इसकी कुल लम्बाई 860 किमी है l महानदी ‘छत्तीसगढ़ राज्य की गंगा’ भी कही जाती है।
  • छत्तीसगढ़ में महानदी के बेसिन को ‘धान का कटोरा’ कहते है l
  • महानदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: शिवनाथ, हंसदेव, मांड, बोरई, ईब l
  • महानदी में दाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: जोंक, दूध, सोंढूर, पैरी
गोदावरी
  • गोदावरी नदी का उद्गम महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्चमी घाट में स्थित ‘त्रियम्बकम’ गाँव की एक पहाड़ी से होता है l
  • यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी है और गंगा के बाद भारत के दूसरी सबसे लम्बी नदी है l
  • इस नदी की कुल लम्बाई 1500 किमी है l
  • यह नदी महाराष्ट्र में 44%, आंध्रप्रदेश में 23% व मध्य प्रदेश में 20% बहती है l
  • यह नदी नौकायन हेतु भी उपयुक्त है l
  • अपने बड़े आकार और विस्तार के कारण इसे ‘दक्षिण गंगा’ कहते है l
  • श्रीराम सागर, गोदावरी बांध, जायकवाड़ी आदि कुछ प्रमुख बांध गोदावरी नदी पर हैं।
  • गोदावरी नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: पूर्णा, वर्धा, पेनगंगा, वेनगंगा(सबसे लम्बी सहायक नदी), प्रन्हिता, इन्द्रावती, पेंच , कानहन, शबरी l
  • गोदावरी नदी में दाए ओर मिलने वाली नदियाँ: प्रवरा, मुला, मांजरा, पेद्दावगु, मानेर l
कृष्णा
  • कृष्णा नदी महाराष्ट्र के पश्चमी घाट में ‘महाबालेश्वर’ के समीप से निकलती है l
  • इसकी लम्बाई लगभग 1400 किमी है और यह प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे लम्बी नदी है l
  • यह नदी 44% कर्नाटक, 29% आंध्रप्रदेश और 27% महाराष्ट्र से होकर बहती है l
  • कृष्णा नदी की सबसे आखिरी सहायक नदी मूसी, वज़ीराबाद के पास आकर इसमें मिलती है l
  • कृष्णा और उसकी सहायक नदियों पर बने हुए कुछ प्रमुख बांध इस प्रकार हैं:- तुंगभद्रा, नागार्जुनसागर, मालप्रभा, भीमा ,कोयना आदि l
  • कृष्णा नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: भीमा, मेन्नुर, मूसी
  • कृष्णा नदी में दाए ओर मिलने वाली नदियाँ: घाटप्रभा, माप्रभा, तुंगभद्रा(सबसे लम्बी सहायक नदी) l
  • कृष्णा नदी की अन्य सहायक नदिया : पंचगंगा, दूधगंगा, वेनगंगा, कोइना, कुंडली, वरुणा, मेला।
कावेरी नदी
  • कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक के कुर्म जिले की ‘ब्रह्मगिरी पहाड़ी’ से होता है l
  • इसकी लम्बाई लगभग 760 किमी है और यह तमिलनाडु में कुडलूर के दक्षिण में बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है l
  • यह नदी 3% केरल, 41% कर्नाटक व 50% तमिलनाडु में बहती है l
  • कावेरी नदी तिरुचिरापल्ली के समीप कावेरी डेल्टा भी बनाती है l
  • कावेरी नदी भारत में दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात बनाती है जिसे ‘शिवसमुद्रम जलप्रपात’ कहते है l
  • कावेरी नदी को ‘दक्षिण की गंगा’ भी कहते है क्योकि इसमें वर्षभर जल बना रहता है इसका कारण है कर्नाटक में दक्षिण पश्चिम मानसून से प्राप्त होने वाला जल व तमिलनाडु में उत्तर पूर्व मानसून से प्राप्त होने वाला जल l
  • कावेरी नदी की घाटी धान उत्पादन हेतु प्रसिद्द है अतः इसे ‘दक्षिण भारत का धान का कटोरा’ भी कहते है l
  • कावेरी नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: भवानी, अमरावती, काबिनी, नोय्यल, लक्ष्मणा, तीर्था l
  • कावेरी नदी में दाए और से मिलने वाली नदियाँ: हेमावती, सिम्सा, अर्कावती l
पेन्नार नदी
  • पेन्नार नदी का उद्गम कर्नाटक के कोलार जिले के ‘नन्दिदुर्ग पहाड़ी’ से होता है l
  • यह नदी कृष्णा व कावेरी नदी के बीच में स्थित है l
  • वैगई नदी: वैगई नदी का उद्गम तमिलनाडु के मदुरै जिले में ‘वरुशनाथ पहाड़ी’ से होता है l
  • यह नदी पाक की खाड़ी में गिरती है l
  • मदुरै इसी नदी के तट पर स्थित है l
  • दामोदर नदी, स्वर्णरेखा नदी व ब्राह्मणी नदी छोटा नागपुर पठार से निकलती है l
  • दामोदर नदी भ्रंस घाटी में बहती है और हुबली में अपना जल गिराती है l
  • वैतरिणी नदी उड़ीसा के क्योझर पठार से निकलती है l
Note: बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों का उत्तर से दक्षिण की ओर क्रम: दामोदर, स्वर्णरेखा, वैतरणी, ब्राह्मणी, महानदी, गोदावरी, कृष्णा पेन्नार, कावेरी, बैगाई, ताम्रपर्णी ।
उपर्युक्त सभी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में अपना जल गिराती है l
  • अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ: लूनी, साबरमती, माही, नर्मदा, तापी, मांडवी, जुराबे, शरावती, गंगावैली, पेरियार, भरतपूजा ।

नर्मदा नदी
  • नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में विद्यांचल पर्वत श्रेणी में स्थित ‘अमरकंटक’ नामक स्थान से होता है l
  • यह नदी मध्य प्रदेश में 87%, गुजरात में 11.5% और महाराष्ट्र में 11.5% बहती है।
  • नर्मदा नदी की सर्वाधिक लम्बाई मध्य प्रदेश में है।
  • मध्य प्रदेश राज्य में इसके विशाल योगदान के कारण इसे “मध्य प्रदेश की जीवन रेखा” भी कहते है।
  • ‘नर्मदा नदी अरब सागर में गिरने वाली प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है।’
  • यह सतपुड़ा व विंध्य के बीच में एक भ्रंश घाटी में बहती है। नर्मदा नदी जबलपुर के निकट भेड़ाघाट में संगमरमर की चट्टानों में ‘कपिलधारा या धुआंधार’ जलप्रपात बनाती है।
  • बरगी बाँध जबलपुर के पास नर्मदा नदी पर स्थित एक वृहद बाँध है l
  • इंदिरा सागर परियोजना, ओंकारेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना, महेश्वर जल विद्युत परियोजना, सरदार सरोवर परियोजना आदि नर्मदा नदी पर स्थित है l
  • नर्मदा नदी खंभात की खाड़ी में गिरती है। नर्मदा नदी की कुल लम्बाई 1312 किमी है l
  • नर्मदा नदी में बाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: शक्कर, तवा, गंजाल, करजन, दूधी, बरनार, शेर, देव l
  • नर्मदा नदी में दाए ओर से मिलने वाली नदियाँ: हिरदन, कोलार, हथनी, ओरसांग, तिन्दोली, हिरन, मान l
ताप्ती नदी
  • ताप्ती नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के ‘मुलताई से सतपुड़ा की श्रेणी’ से होता है।
  • यह नदी 79% महाराष्ट्र में, 15% मध्य प्रदेश में व 6% गुजरात में बहती है l
  • यह नदी सतपुड़ा व अजंता के बीच भ्रंश घाटी में बहती है l
  • तापी नदी अरब सागर में जल गिराने वाली प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
  • ताप्ती नदी खम्भात की खाड़ी में गिरती है l
  • खम्भात की खाड़ी में गिरने से पूर्व इसके मुहाने पर सूरत शहर बसा हुआ है l
  • ताप्ती नदी पर काकरापारा व उकाई (गुजरात) जैसी परियोजनाये बनी है l ताप्ती नदी की कुल लम्बाई 724 किमी है l
  • ताप्ती नदी की सहायक नदियाँ: मिन्धोला, गिरना, पन्ज़ारा, वाघूर, पूर्णा, बोरी एवं आनेर।
साबरमती नदी
  • साबरमती नदी का उद्गम राजस्थान के उदयपुर जिले में ‘अरावली पर्वत श्रृंखला’ से होता है।
  • धरोई बाँध योजना साबरमती नदी पर स्थित है l
  • इसके द्वारा साबरमती नदी के जल का प्रयोग गुजरात में सिंचाई और विद्युत् उत्पादन के लिए होता है।
  • गांधी जी ने 1915 में अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर साबरमती आश्रम की स्थापना की।
  • साबरमती नदी की कुल लम्बाई 371 किमी है l
  • साबरमती नदी की सहायक नदियाँ: वाकल, सेई, हरनव, मोहर, हाथमती, वतक, मेसवा, वटराक,खारी और मधुमती ।
माही नदी
  • माही नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के धार जिले के समीप मिन्डा ग्राम की ‘विध्यांचल पर्वत श्रंखला’ से होता है l
  • “माही नदी कर्क रेखा को दो बार काटने वाली भारत की एकमात्र नदी है l”
  • बजाज सागर (बांसवाड़ा)एवं कदाणा बाँध माही नदी पर बना है l
  • माही नदी की कुल लम्बाई 576 किमी है l
  • माही नदी की सहायक नदियाँ: सोम, जाखम, चाप, बनास, मोरेन, इरू l
लूनी नदी
  • लूनी नदी का उद्गम राजस्थान के अरावली पर्वत के निकट अजमेर जिले की ‘नाग पहाड़ी’ से होता है l
  • हेमावास बाँध, सरदार समंद बाँध, जवाई बाँध, बाँकली बाँध लूनी नदी पर स्थित बाँध है l
  • लूनी नदी की कुल लंबाई 495 किमी है।
  • लूनी नदी गुजरात के कच्छ जिले में प्रवेश करती है, और इसके पश्चात् ‘कच्छ के रन’ में विलुप्त हो जाती है।
घग्घर नदी
  • घग्घर नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश के शिवालिक पहाड़ी में शिमला के पास से होता है l
  • घग्घर नदी राजस्थान के गंगानगर में प्रवेश करती है और थार के मरुस्थल में विलुप्त हो जाती है l
  • घग्घर नदी की कुल लम्बाई 456 किमी है l
कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्य;
  • भारत की व्रह्तम नदी है – गंगा
  • कावेरी जल विवाद मुख्यतः जिन राज्यों के बीच है – कर्नाटक व तमिलनाडु
  • मानस नदी उपनदी है – ब्रम्ह्पुत्र
  • सबसे अधिक मार्ग बदलने वाली नदी है – कोसी
  • अजमेर स्थित है – लूनी नदी के किनारे
  • वह नदी जो राष्ट्रीय जलमार्ग (NW-1) पर स्थित है – गंगा
  • भारत में सबसे ऊँची ज्वारीय ज्वार्भित्ति वाली नदी – हुगली
  • भारत में सबसे बड़ा नदी मुख जिस नदी के मुख पर है – हुगली
  • भारत की वह नदी जिसे ‘जैविक मरुस्थल’ कहते है – दामोदर
  • कोपली सहायक नदी है – ब्रह्मपुत्र की
  • वह नदी जो ओड़िसा में अपना डेल्टा बनाती है – महानदी
  • सलाल प्रोजेक्ट का सम्बन्ध है – चेनाब नदी से
  • वर्षा जल संग्रहण के तरीके खदीन व जोहन भारत के जिस राज्य में प्रचलित है – राजस्थान
  • भारत व बांग्लादेश के बीच जिस नदी को लेकर विवाद है, वह नदी है – तीस्ता
  • पंजाब के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण नदी है – सिन्धु नदी
  • भारत में सबसे बड़ा नदी बेसिन है – गंगा नदी का
  • भारत में दूसरा सबसे बड़ा नदी बेसिन है – गोदावरी नदी का
  • नदी का अध्ययन विज्ञान की जिस शाखा के अंतर्गत किया जाता है – पोटामोलोजी (Potamology)
  • वह नदी जिसे नर नदी कहा जाता है – ब्रह्मपुत्र नदी (ब्रह्मा का पुत्र)
  • भारत की सबसे खतरनाक नदी – विश्वमित्र नदी
  • ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है – कोसी नदी को
  • ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता है – दामोदर नदी को
  • ‘वृद्ध गंगा/बूढ़ी गंगा’ कहा जाता है – गोदावरी नदी को
  • भारत की सबसे गहरी नदी – भागीरथी व अलकनंदा
  • भारत की ‘नील नदी’ कहते है – ब्रह्मपुत्र नदी को
  •  पांच नदियों की भूमि कहा जाता है – पंजाब को
  • अल्माटी बाँध स्थित है – कृष्णा नदी पर
  • खून की नदी कहा जाता है – लोहित नदी को
  • हगरी सहायक नदी है – तुंगभद्रा की
  • गंगा की सहायक नदियों का पश्चिम से पूर्व की और क्रम – यमुना, घाघरा, सोन, गंडक व कोसी
  • वे नदियाँ जिनका उद्गम अमरकंटक से होता है – नर्मदा, सोन व महानदी
  • वह नदी जो विध्य व सतपुड़ा की श्रेणी के मध्य से गुजरती है – नर्मदा
  • ‘नर्मदा जल विवाद न्यायधिकरण’ जिन राज्यों के बीच जल के बंटवारे को सुलझाने के लिए गठित किया गया था – गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश
  • ‘दक्षिण भारत की गंगा’ कहा जाता है – गोदावरी
  • प्रायद्वीपीय भारत की एकमात्र बारहमासी नदी है – कावेरी
  • उत्तर-पूर्वी भारत में बहने वाली एकमात्र राष्ट्र्पारीय नदी है – ब्रह्मपुत्र
  • भारत में जिस नदी को खुला नाला कहा जाता है – यमुना
  • जोग जलप्रपात स्थित है – शरावती नदी पर
  • सियाचीन ग्लेशियर से निकलने वाला जल जिस नदी का प्रमुख स्त्रोत है – नूबरा नदी
  • ढूधगंगा नदी स्थित है – जम्मू कश्मीर में
  • दो नदियों के बीच के उपजाऊ मैदान को कहा जाता है – दोआब
  • जब नदी मैदानी भाग में प्रवेश करती है तो वह मोड़दर मार्ग में बहने लगती है जिसे कहा जाता है – विसर्प
  • वह प्रक्रिया जो नदी की तरुणावस्था में होती है – घाटी को गहरा करना
  • इंदिरा गांधी सागर बाँध स्थित है – कावेरी नदी पर
  • आइजोल स्थित है – प्लावंग नदी के तट पर
  • भारत की सबसे लम्बी सहायक नदी है – यमुना नदी
  • दक्षिण भारत की नदियों की लंबाई का क्रम – गोदावरी > कृष्णा > महानदी > नर्मदा > कावेरी
  • कृष्णा और कावेरी के बीच बेसिन स्थित है – पेन्नार बेसिन
  • असम और पश्चिम बंगाल की सीमा बनाती है – संकोशी नदी
  • बद्रीनाथ का प्रसिद्ध मंदिर जिस नदी के तट पर स्थित है – अलकनंदा
  • स्टेनले जलाशय जिस नदी पर स्थित है – कावेरी नदी
  • केदारनाथ का प्रसिद्ध मंदिर किस नदी के तट पर स्थित है – मंदाकिनी

गंगा नदी तंत्र की सहायक नदियों के उद्गम स्थल

नदी का नाम
लम्बाई ( किमी. में )
उद्गम स्थल
संगम/मुहाना
ब्रह्मपुत्र
2900
मानसरोवर झील के समीप स्थित चीमायुंगदुंग हिमानी
बंगाल की खाड़ी
सिन्धु
2880 ( 709+2171 )
मानसरोवर झील के समीप स्थित सानोख़्वाब हिमनद
अरब सागर
गंगा
2510 ( 2071+439 )
भागीरथी और अलकनंदा संगम स्थल देवप्रयाग
बंगाल की खाड़ी
चिनाब
1800
बारालाचा दर्रा ( लाहोल-स्पीति )
सिन्धु नदी
गोदावरी
1465
नासिक ( महाराष्ट्र ) के दक्षिण-पश्चिम में 42 किमी. दूर स्थित गाँव की एक पहाड़ी
बंगाल की खाड़ी
सतलुज
1440 ( 1050+390 )
मानसरोवर झील के समीप स्थित राकस ताल
चिनाब नदी
यमुना
1375
बन्दरपूँछ के पश्चिमी ढाल पर स्थित यमुनोत्री हिमानी
प्रयाग ( इलाहाबाद ) गंगा नदी
कृष्णा
1327
महाबलेश्वर के समीप पश्चिमी घाट के पहाड़ों से
बंगाल की खाड़ी
नर्मदा
1312
विंध्याचल पर्वत श्रेणियों में स्थित अमरकंटक नामक स्थान
खम्भात की खाड़ी
महानदी
1057
मध्य प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित सिंहवा के समीप
बंगाल की खाड़ी ( कटक के निकट )
घाघरा
1080
मत्सातुंग हिमानी
गंगा नदी
चम्बल
960
मध्य प्रदेश में महू के निकट स्थित जनापाव पहाड़ी
यमुना नदी
कावेरी
805
कर्नाटक के कुर्ग जिले में स्थित ब्रह्मागिरी पहाड़ी
बंगाल की खाड़ी
सोन
780
अमरकंटक की पहाड़ियाँ
गंगा नदी
कोसी
730
गोसाई थाम चोटी के उत्तर में
गंगा नदी
झेलम
725
बेरेनाग ( कश्मीर ) के समीप शेषनाग झील
चिनाब नदी
रावी
720
कांगड़ा जिले में रोहतांग दर्रे के समीप
चिनाब नदी
ताप्ती
724
बैतूल जिले ( म.प्र. ) मुल्ताई नगर के पास
खम्भात की खाड़ी
रामगंगा
690
नैनीताल के निकट एक हिमनदी से
गंगा नदी
माही
560
विंध्याचल पर्वत श्रेणी
खम्भात की खाड़ी
घघ्घर
494
कालका के समीप हिमालय
हनुमानगढ़ ( राजस्थान )
बेतवा
480
विंध्याचल पर्वत
यमुना नदी
व्यास
470
रोहतांग दर्रे के समीप ताल
सतलुज नदी
लूनी
450
अजमेर जिले में स्थित नाग पहाड़ ( अरावली पर्वत )
कच्छ का रण
गण्डक
425
नेपाल
गंगा नदी
साबरमती
416
उदयपुर जिले में दक्षिण पश्चिमी भाग ( अरावली पर्वत )
कच्छ का रन क्षेत्र

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