भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण घटनाओं की सूची 1857-1947

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महत्वपूर्ण घटनाओं की सूची 1857-1947

1857 का विद्रोह:
1857 का विद्रोह, जिसे ‘सिपाही विद्रोह’ और ‘सवागत संकट’ के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक पहलु था जिसने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया। इस विद्रोह का प्रारंभ 1857 में हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का आदि आपदा और सचेतना था।
पिछले इतिहास में साम्राज्य और अधिकारवाद:
1857 के विद्रोह के पूर्व, भारत ने लम्बे समय तक विभिन्न विदेशी साम्राज्यों के शासन में रहा था। आर्य, फारसी, ईरानी, मुगल, चंगेज खान, मंगोलियाई, और सिकंदर जैसे आक्रमणकारियों ने भारत को अपने अधिकार में किया। इन आक्रमणों के परिणामस्वरूप भारतीय समाज कई बार विदेशी हुक्मरानों के अधीन रहा और उनकी अधिकारवादी नीतियों का प्रभाव अनुभव किया।
1757 के प्लासी के युद्ध के बाद, ब्रिटिश भारत में राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने लगे और इसके बाद लगभग 200 साल तक भारत पर राज किया। ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन, भारतीय समाज में विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न हुईं, जैसे कि आर्थिक और सामाजिक असमानता, संस्कृति और धर्म के प्रति आपत्ति, और नियमन के खिलाफी आंदोलन।
1857 का विद्रोह और स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास एक दिवसीय लेख में पूरी तरह से समाहित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इसके इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण घटनाएं और महापुरुषों के योगदान की बेहद विस्तारित एवं संगठित रूप से वर्णन की आवश्यकता होती है। इसलिए, हम इस लेख में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य घटकों और महत्वपूर्ण घटनाओं के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को हाथ में लेंगे।
1857 का विद्रोह:
1857 का विद्रोह, जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला उदाहरण माना जाता है, भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण पारंपरिक घटना था। इसे आपदा, सिपाही विद्रोह, या सिपाही बगावत के नाम से भी जाना जाता है। इस विद्रोह की शुरुआत मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुई, जहां सेपाही भर्ती करने के लिए नई राइफल कारतूसों के उपयोग की शर्त के खिलाफ आवाज उठी थी।
नई कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का तेल था, जिसे हिन्दू और मुस्लिम सिपाहियों को अपने आधारिक धार्मिक मान्यता के खिलाफ इस्तेमाल करना नहीं चाहते थे। इसका परिणाम था कि वे बेरोजगार हो गए और अपने आप को असमान महसूस करने लगे।
विद्रोह का प्रसार जल्दी ही दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुआ, और विद्रोही सिपाहियों ने बहुत अधिक स्थानों पर प्रभाव डाला। इसके बावजूद, 1857 का विद्रोह असफल रहा और अंग्रेजों की सेना ने बर्बरता के साथ इसका निपटान किया, जिससे लोग निराश हो गए। इस विद्रोह के परिणामस्वरूप दिल्ली, अवध, रोहिलखंड, बुंदेलखंड, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ, और पश्चिमी बिहार जैसे क्षेत्रों में अधिकांश लड़ाइयां लड़ी गईं। इसके बावजूद, 1857 का विद्रोह एक महत्वपूर्ण पहला कदम था जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत का प्रतीक बना।
1857 के विद्रोह के बाद:
1857 के विद्रोह के बाद, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बड़े परिवर्तन आए। एक साल में ही अंग्रेजों ने इस विद्रोह को दबा दिया और भारत को अधिक जड़ से अपने नियंत्रण में कर लिया। इसके परिणामस्वरूप, ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत हुआ और ब्रिटिश सरकार ने भारत के नियमन का पूरा जिम्मेदारी संभाल लिया। महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राज्ञी के रूप में घोषित किया गया।
1857 के विद्रोह के बाद, कई भारतीय नेता और सुधारक प्रमुख रूप से उभरे, जिनमें राजा राम मोहन राय, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महापुरुष थे। इन नेताओं का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना था। उन्होंने भारतीय समाज को समाजवाद, महिला सशक्तिकरण, और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:
1876 में, सुरेन्द्र नाथ बैनर्जी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश्य था मध्यमवर्गीय शिक्षित नागरिकों के विचारों को आगे बढ़ाना और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए संगठन करना।
1906 में, कोलकाता में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में “स्वराज” की मांग की घोषणा की गई और इसके साथ ही “स्वदेशी आंदोलन” की शुरुआत हुई।
1911 में, पश्चिम बंगाल का विभाजन किया गया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उत्तराधिकारी क्षेत्र को न्यायिक तौर पर भटकने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रयास आगे बढ़ा और भारतीय नागरिकों के आवश्यक अधिकारों की मांग को मजबूत बनाया।
महात्मा गांधी का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान:
महात्मा गांधी को भारत के राष्ट्रपिता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अहिंसक प्रतिरोध का मार्ग अपनाया और भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की और भारत लौटने के बाद वकालत शुरू की। 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद, गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। उन्होंने भारत में अहिंसक प्रतिरोध के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई शुरू की।
गांधीजी के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का आयोजन किया गया, जिनमें शामिल हैं:
  • असहयोग आंदोलन (1920-1922): इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ सभी संबंधों को तोड़ना था। इसमें सरकारी नौकरियों, स्कूलों, और अदालतों का बहिष्कार शामिल था।
  • साइमन कमीशन का विरोध (1928): साइमन कमीशन में किसी भी भारतीय सदस्य को शामिल नहीं किया गया था। गांधीजी ने इस कमीशन का विरोध किया और सभी भारतीयों से इसे बहिष्कृत करने का आह्वान किया।
  • नागरिक अवज्ञा आंदोलन (1930): इस आंदोलन का उद्देश्य नमक के कानून का उल्लंघन करना था। गांधीजी ने दांडी यात्रा शुरू की, जिसमें उन्होंने 24 दिनों तक पैदल चलकर समुद्र तट तक गए और वहां से नमक बनाया।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करना था। इस आंदोलन में हिंसा की कुछ घटनाएं भी हुईं, जिसके कारण गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया।
गांधीजी के नेतृत्व में हुए इन आंदोलनों ने ब्रिटिश सरकार को भारत से स्वतंत्र होने के लिए मजबूर किया। 15 अगस्त, 1947 को, भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की।
गांधीजी के अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतों ने दुनिया भर में स्वतंत्रता संग्रामों को प्रेरित किया। उन्हें उनके योगदान के लिए दुनिया भर में सम्मान दिया जाता है।
गांधीजी के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के कुछ विशिष्ट पहलू:
  • अहिंसक प्रतिरोध: गांधीजी ने अहिंसा को एक शक्तिशाली राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया, लेकिन बिना किसी हिंसा के।
  • जनता का समर्थन: गांधीजी ने लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट करने में कामयाब रहे। उन्होंने लोगों को अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।
  • अंतरराष्ट्रीय समर्थन: गांधीजी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त किया। उन्होंने दुनिया भर के नेताओं और लोगों से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करने का आह्वान किया।
गांधीजी के योगदान की विरासत:
गांधीजी के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को भारत और दुनिया भर में याद किया जाता है। उनके अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और स्वतंत्रता संग्रामों को प्रेरित करते हैं।

स्वतंत्रता संग्राम की समयरेखा:

साल
स्थान
घटना
नायक (स्वतंत्रता सेनानी)
1857
बरहमपुर
19वीं इन्फंट्री के सिपाहियों का राइफल अभ्यास से इंकार।
1857
मेरठ
सैनिक विद्रोह
1857
अंबाला
अंबाला में गिरफ्तारी
1857
बेरकपोर
मंगल पांडे का ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला और बाद में मंगल पांडे को फांसी दे दी गयी थी.
मंगल पांडे
1857
लखनउ
लखनउ में 48वां विद्रोह
1857
पेशावर
मूल सेना का निरस्त्रीकरण
1857
कानपुर
दूसरी केवलरी का विद्रोह सतीचैरा घाट नरसंहार बीबीघर में महिलाओं और बच्चों का नरंसहार
1857
दिल्ली
बदली-की-सेराई की लड़ाई
1857
झांसी
रानी लक्ष्मीबाई का दत्तक पुत्र के हकों को नकारे जाने के प्रति विरोध प्रदर्शन और हमलावर सेनाओं से झांसी को बचाने का सफल प्रयास
रानी लक्ष्मीबाई
1857
मेरठ
सिपाहियों और भीड़ द्वारा 50 यूरोपियों की हत्या
1857
कानपुर
कानपुर की दूसरी लड़ाईः तात्या टोपे का कंपनी की सेना को हराना
तात्या टोपे
1857
झेलम
देसी सेना द्वारा ब्रिटिश विरोधी गदर
1857
गुरदासपुर
त्रिम्मू घाट की लड़ाई
1858
कलकत्ता
ईस्ट इंडिया कंपनी का खात्मा
1858
ग्वालियर
ग्वालियर की लड़ाई जिसमें रानी लक्ष्मीबाई ने मराठा बागियों के साथ सिंधिया शासकों के कब्जे से ग्वालियर छुड़ाया
रानी लक्ष्मीबाई
1858
झांसी
रानी लक्ष्मीबाई की मौत
रानी लक्ष्मीबाई
1859
शिवपुरी
तात्या टोपे कब्जे में और उनकी हत्या
तात्या टोपे
1876
महारानी विक्टोरिया भारत की साम्राज्ञी घोषित
1885
बॉम्बे
ए ओ हयूम द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन
ए ओ हयूम
1898
लॉर्ड कर्जन वायसराय बने
1905
सूरत
स्वदेशी आंदोलन शुरु
1905
बंगाल
बंगाल का विभाजन
1906
ढाका
ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन
आगा खान तृतीय
1908
30 अप्रेलः खुदीराम बोस को फांसी
1908
मांडले
राजद्रोह के आरोप में तिलक को छह साल की सजा
बाल गंगाधर तिलक
1909
मिंटो-मार्ले सुधार या इंडियन काउंसिल एक्ट
1911
दिल्ली
दिल्ली दरबार आयोजित। बंगाल का विभाजन रद्द
1912
दिल्ली
नई दिल्ली भारत की नई राजधानी बना
1912
दिल्ली
लॉर्ड हार्डिंग की हत्या का दिल्ली साजिश मामला
1914
सेन फ्रांसिसको में गदर पार्टी का गठन
1914
कोलकाता
कोमारगाता मारु घटना
1915
मुंबई
गोपाल कृष्ण गोखले की मौत
1916
लखनउ
लखनउ एक्ट पर हस्ताक्षर
मोहम्मद अली जिन्ना
1916
पुणे
तिलक द्वारा पुणे में पहली इंडियन होम रुल लीग का गठन
बाल गंगाधर तिलक
1916
ंमद्रास
एनी बेसेंट द्वारा होम रुल लीग का नेतृत्व
एनी बेसेंट
1917
चंपारण
महात्मा गांधी द्वारा बिहार में चंपारण आंदोलन शुरु
महात्मा गांधी
1917
राज्य सचिव एडविन शमूएल मोंटेगू द्वारा मोंटेगू घोषणा
1918
चंपारण
चंपारण अगररिया कानून पास
1918
खेड़ा
खेड़ा सत्याग्रह
1918
भारत में ट्रेड संघ आंदोलन शुरु
1919
अमृतसर
जलियावाला बाग नरसंहार
1919
लंदन में इंपिरियल लेजिसलेटिव काउंसिल द्वारा ोलेट अधिनियम पास
1919
खिलाफत आंदोलन शुरु
1920
तिलक का कांग्रेस डेमोक्रेटिक पार्टी गठन
1920
असहयोग आंदोलन शुरु
महात्मा गांधी
1920
अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस शुरु
नारायण मल्हार जोशी
1920
कलकत्ता
गांधीजी द्वारा प्रस्ताव पारित जिसमें अंग्रेजों से भारत को अधिराज्य का दर्जा देने को कहा गया
महात्मा गांधी
1921
मालाबार
मोपलाह विद्रोह
1922
चैरी चैरा
चैरी चैरा घटना
1922
इलाहबाद
स्वराज पार्टी गठित
सरदार वल्लभ भाई पटेल
1925
1925
काकोरी
काकोरी षडयंत्र
रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद
1925
बारडोली
बारडोली सत्याग्रह
वल्लभ भाई पटेल
1928
बॉम्बे
बॉम्बे में साइमन कमीशन आया और अखिल भारतीय हड़ताल हुई
1928
लाहौर
लाला लाजपत राय पर पुलिस की ज्यादती और जख्मों के चलते उनकी मौत
लाला लाजपत राय
1928
नेहरु रिपोर्ट में भारत के नए डोमिनियन संविधान का प्रस्ताव
मोतीलाल नेहरु
1929
लाहौर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन आयोजित
पंडित जवाहरलाल नेहरु
1929
लाहौर
कैदियों के लिए सुविधाओं की मांग करते हुए भूख हड़ताल करने पर स्वतंत्रता सेनानी जतिंद्रनाथ दास की मौत
जतिंद्र नाथ दास
1929
ऑल पार्टी मुस्लिम कांफ्रेंस ने 14 सूत्र सुझाए
मोहम्मद अली जिन्ना
1929
दिल्ली
सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली में बम फेंका जाना
भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त
1929
भारतीय प्रतिनिधियों से मिलने राउंड टेबल कांफ्रेंस की लाॅर्ड इरविन की घोषणा
1929
लाहौर
जवाहरलाल नेहरु ने भारतीय ध्वज फहराया
1930
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज घोषित किया
1930
साबरमति आश्रम
दांडी मार्च के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरु
महात्मा गांधी
1930
चिटगांव
चिटगांव शस्त्रागार पर छापा
सूर्य सेन
1930
लंदन
साइमन कमीशन की रिपोर्ट पार विचार हेतु लंदन में पहली गोल मेज बैठक
1931
लाहौर
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु
1931
महात्मा गांधी और लाॅर्ड इरविन द्वारा गांधी इरविन पैक पर दस्तखत
1931
दूसरी राउंड टेबल बैठक
महात्मा गांधी, सरोजिनी नायडू, मदन मोहन मालवीय, घनश्यामदास बिड़ला, मोहम्मद इकबाल, सर मिर्जा इस्माइल, उसके दत्ता, सर सैयद अली इमाम
1932
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसकी सहयोगी संस्थाएं अवैध घोषित
1932
बिना ट्रायल के गांधी विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार
महात्मा गांधी
1932
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने भारतीय अल्पसंख्यकों के लिए अलग निर्वाचक मंडल बनाकर ‘सांप्रदायिक अवार्ड’ घोषित किया
1932
गांधीजी ने अछूत जातियों की हालत में सुधार हेतु आमरण अनषन किया जो छह दिन चला
महात्मा गांधी
1932
लंदन
तीसरी राउंड टेबल कांफ्रेंस
1933
अछूतों के कल्याण की ओर ध्यान की मांग पर गांधीजी ने उपवास किया
महात्मा गांधी
1934
गांधीजी ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग किया और सकारात्मक कार्यक्रमों के लिए समर्पित किया
महात्मा गांधी
1935
भारत सराकर अधिनियम 1935 पास
1937
भारत सराकर अधिनियम 1935 के तहत भारत प्रांतीय चुनाव हुए
1938
हरीपुरा
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हरीपुरा अधिवेशन हुआ
1938
सुभाष चंद्र बोस को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया
सुभाष चंद्र बोस
1939
जबलपुर
त्रिपुरी अधिवेशन हुआ
1939
ब्रिटिश सरकार कह नीतियों के विरोध में कांग्रेस मंत्रियों का इस्तीफा। सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया
सुभाष चंद्र बोस
1939
कांग्रेस मंत्रियों के त्यागपत्र के जश्न में मुस्लिम लीग ने उद्धार दिवस मनाया
मोहम्मद अली जिन्ना
1940
मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए अलग राज्य की मांग करते हुए लाहौर अधिवेशन
1940
लाॅर्ड लिंलीथगो ने अगस्त आॅफर 1940 बनाया जिसमें भारतीयों को उनका संविधान बनाने का अधिकार दिया गया
1940
वर्धा
कांग्रेस कार्यकारिणी समिति ने अगस्त आॅफर ठुकराया और एकल सत्याग्रह शुरु किया
1941
सुभाष चंद्र बोस ने भारत छोड़ा
सुभाष चंद्र बोस
1942
भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त आंदोलन शुरु
1942
चर्चिल ने क्रिप्स आंदोलन शुरु किया
1942
बाॅम्बे
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव शुरु किया
1942
गांधीजी और कांग्रेस के अन्य बड़े नेता गिरफ्तार
महात्मा गांधी
1942
आजाद हिंद फौज का गठन
सुभाष चंद्र बोस
1943
पोर्ट ब्लेयर
सेल्युलर जेल को भारत की अस्थाई सरकार का मुख्यालय घोषित किया गया
1943
सुभाष चंद्र बोस ने भारत की अस्थाई सरकार के गठन की घोषणा की
सुभाष चंद्र बोस
1943
कराची
मुस्लिम लीग के कराची अधिवेशन में बांटो और राज करो नारा अपनाया गया
1944
मोरेंग
जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज के कर्नल शौकत मलिक ने इस क्षेत्र में अंग्रेजों को हराया
कर्नल शौकत अली
1944
शिमला
भारतीय राजनीतिक नेताओं और वायसराय आर्किबाल्ड वेवलीन के बीच शिमला सम्मेलन
1946
दिल्ली
केबिनेट मिशन प्लान पास
1946
दिल्ली
संविधान सभा का गठन
1946
राॅयल इंडियन नेवी गदर
1946
दिल्ली
नई दिल्ली में केबिनेट मिशन का आगमन
1946
लाहौर
जवाहरलाल नेहरु ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला
जवाहरलाल नेहरु
1946
भारत की अंतरिम सरकार बनी
1946
दिल्ली
भारत की संविधान सभा का पहला सम्मेलन
1947
ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने ब्रिटिश भारत को ब्रिटिश सरकार का पूर्ण सहयोग देने की घोषणा की
1947
लार्ड माउंटबेटन भारत के वायसराय नियुक्त और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल बने
1947
15 अगस्त 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत भारत के भारत और पाकिस्तान में विभाजन हेतु माउंटबेटन प्लान बनाया गया

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