भारतीय संविधान: अनुच्छेद 5 – 11 नागरिकता के अधिकार

संविधान और नागरिकता के अधिकार

नागरिकता किसी व्यक्ति की वह स्थिति है जिसे कानून के तहत एक संप्रभु राज्य का कानूनी सदस्य या किसी राष्ट्र से संबंधित होने के रूप में मान्यता दी जाती है। यह व्यक्ति के पास नागरिक और राजनीतिक अधिकार होते हैं, जो उसे उस राज्य में रहने और उसके सरकारी सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। नागरिकता का अधिकार और दायित्व आधारित होता है, और यह व्यक्ति को उसके जन्म के स्थान, वंश, और व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर प्राप्त होता है।
भारत में, नागरिकता की अवधारणा संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 में संबंधित है। यह संविधान के इस भाग में नागरिकता के प्राप्ति और हानि के नियमों को स्थापित करता है और नागरिकता के अधिकार और कर्तव्यों को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 5: संविधान के प्रारंभ में नागरिकता

भारत के संविधान के अनुच्छेद 5 के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को भारतीय क्षेत्र में अधिवास करने वाले सभी व्यक्ति, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हैं, भारत के नागरिक हैं:
  • जन्म से नागरिकता: यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारतीय क्षेत्र में हुआ है, तो वह जन्म से ही भारत का नागरिक है।
  • वंश से नागरिकता: यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक है, तो वह वंश से भारत का नागरिक है।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता: यदि कोई व्यक्ति भारत में 12 वर्षों से लगातार निवास कर रहा है और वह भारत के लिए वफादारी और निष्ठा की शपथ लेता है, तो वह पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकता है।
विशिष्ट प्रावधान
  • जन्म से नागरिकता: अनुच्छेद 5 के खंड (1) के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को भारतीय क्षेत्र में अधिवास करने वाले सभी व्यक्ति, जो भारत में पैदा हुए हैं, जन्म से ही भारत के नागरिक हैं। इस प्रावधान के तहत, भारतीय क्षेत्र में पैदा हुए सभी बच्चे, चाहे उनके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी हो, भारत के नागरिक हैं।
  • वंश से नागरिकता: अनुच्छेद 5 के खंड (2) के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को भारतीय क्षेत्र में अधिवास करने वाले सभी व्यक्ति, जिनके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक है, वंश से भारत के नागरिक हैं। इस प्रावधान के तहत, भारत के बाहर पैदा हुए बच्चे, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक है, वंश से भारत के नागरिक हैं।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता: अनुच्छेद 5 के खंड (3) के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को भारतीय क्षेत्र में अधिवास करने वाले सभी व्यक्ति, जो भारत में 12 वर्षों से लगातार निवास कर रहे हैं और जो भारत के लिए वफादारी और निष्ठा की शपथ लेते हैं, पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं। इस प्रावधान के तहत, भारत में 12 वर्षों से लगातार निवास करने वाले विदेशी नागरिक, जो भारत के लिए वफादारी और निष्ठा की शपथ लेते हैं, पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं।
महत्व
अनुच्छेद 5 भारत के नागरिकों की पहचान और स्थिति को परिभाषित करता है। यह उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या 26 जनवरी 1950 को भारत में पैदा हुए सभी बच्चे भारत के नागरिक हैं?
हाँ, 26 जनवरी 1950 को भारत में पैदा हुए सभी बच्चे, चाहे उनके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी हो, जन्म से ही भारत के नागरिक हैं।
  • क्या भारत के बाहर पैदा हुए बच्चे, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक है, वंश से भारत के नागरिक हैं?
हाँ, भारत के बाहर पैदा हुए बच्चे, जिनके माता-पिता में से कम से कम एक भारत का नागरिक है, वंश से भारत के नागरिक हैं।
  • क्या भारत में 12 वर्षों से लगातार निवास करने वाले विदेशी नागरिक, जो भारत के लिए वफादारी और निष्ठा की शपथ लेते हैं, पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं?
हाँ, भारत में 12 वर्षों से लगातार निवास करने वाले विदेशी नागरिक, जो भारत के लिए वफादारी और निष्ठा की शपथ लेते हैं, पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकते हैं।
 भारत के संविधान के अनुच्छेद 6 के अनुसार, 26 जनवरी 1950 को भारत के नागरिक थे या बन गए थे, ऐसे कुछ व्यक्तियों को पाकिस्तान से प्रवास करने के बाद भी भारत का नागरिक माना जाएगा। ये व्यक्ति निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हैं:
  • उनका या उनके माता-पिता या उनके दादा-दादी में से किसी का जन्म भारत में हुआ था जैसा कि 1935 के भारत सरकार अधिनियम में दिया गया है।
  • यदि ऐसा व्यक्ति 19 जुलाई 1948 से पहले प्रवास कर चुका है और अपने प्रवास के बाद से भारत में सामान्य रूप से निवासी है।
  • ऐसे मामले में जैसे कि कोई व्यक्ति 19 जुलाई 1948 के बाद प्रवासित हुआ है और उसे उसके द्वारा किए गए आवेदन पर भारत डोमिनियन सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत किया गया है। संविधान के प्रारंभ से पहले एक अधिकारी, बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अपने आवेदन की तारीख से ठीक पहले कम से कम 6 महीने तक भारत में निवासी न रहा हो।
विशिष्ट प्रावधान
  • जन्म से नागरिकता: अनुच्छेद 6 के खंड (1) के अनुसार, पाकिस्तान से प्रवास करने वाले किसी भी व्यक्ति को भारत का नागरिक माना जाएगा यदि उसके या उसके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी का जन्म भारत में हुआ था जैसा कि 1935 के भारत सरकार अधिनियम में दिया गया है। इस प्रावधान के तहत, पाकिस्तान से प्रवास करने वाले सभी व्यक्ति, जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं, भारत के नागरिक हैं।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता: अनुच्छेद 6 के खंड (2) के अनुसार, पाकिस्तान से प्रवास करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा यदि वह 19 जुलाई 1948 के बाद प्रवास कर चुका है और उसे भारत डोमिनियन सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत किया गया है। संविधान के प्रारंभ से पहले एक अधिकारी, बशर्ते कि किसी भी व्यक्ति को तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि वह अपने आवेदन की तारीख से ठीक पहले कम से कम 6 महीने तक भारत में निवासी न रहा हो। इस प्रावधान के तहत, पाकिस्तान से प्रवास करने वाले वे व्यक्ति जो भारत में रहना चाहते हैं, भारत के नागरिक बन सकते हैं।
महत्व
अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से प्रवास करने वाले व्यक्तियों को भारत का नागरिकता प्रदान करता है। यह उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या पाकिस्तान से प्रवास करने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखता है, भारत का नागरिक है?
हाँ, पाकिस्तान से प्रवास करने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखता है, अनुच्छेद 6 के तहत भारत का नागरिक है।
  • क्या पाकिस्तान से प्रवास करने वाला कोई भी व्यक्ति जो 19 जुलाई 1948 के बाद प्रवास कर चुका है, भारत का नागरिक बन सकता है?
हाँ, पाकिस्तान से प्रवास करने वाला कोई भी व्यक्ति जो 19 जुलाई 1948 के बाद प्रवास कर चुका है, भारत डोमिनियन सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी द्वारा भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हो सकता है, बशर्ते कि वह अपने आवेदन की तारीख से ठीक पहले कम से कम 6 महीने तक भारत में निवासी रहा हो।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 7 के अनुसार, 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुए और बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो और 6 महीने तक भारत रहे हो, ऐसे व्यक्ति को अनुच्छेद 7 के अनुसार भारत का नागरिक माना जाएगा।
विशिष्ट प्रावधान
  • पाकिस्तान से प्रवास: अनुच्छेद 7 के खंड (1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ हो और बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो, भारत का नागरिक माना जाएगा।
  • भारत में निवास: अनुच्छेद 7 के खंड (2) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ हो और बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो और भारत में कम से कम 6 महीने तक निवास कर रहा हो, भारत का नागरिक माना जाएगा।
महत्व
अनुच्छेद 7 पाकिस्तान से प्रवास करने वाले व्यक्तियों को भारत का नागरिकता प्रदान करता है। यह उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है?
नहीं, 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है।
  • क्या 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ कोई भी व्यक्ति जो बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो, भारत का नागरिक है?
हाँ, 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ कोई भी व्यक्ति जो बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो और भारत में कम से कम 6 महीने तक निवास कर रहा हो, भारत का नागरिक है।
विशेष प्रावधान के बारे में अधिक जानकारी
अनुच्छेद 7 के खंड (1) में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ हो और बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो, भारत का नागरिक माना जाएगा। यह प्रावधान उन व्यक्तियों को कवर करता है जो भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन बाद में भारत लौट आए।
अनुच्छेद 7 के खंड (2) में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ हो और बाद में पुनः लौटकर भारत आया हो और भारत में कम से कम 6 महीने तक निवास कर रहा हो, भारत का नागरिक माना जाएगा। यह प्रावधान उन व्यक्तियों को कवर करता है जो भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन बाद में भारत लौट आए और भारत में कम से कम 6 महीने तक निवास कर रहे हैं।
अनुच्छेद 7 के महत्व
अनुच्छेद 7 पाकिस्तान से प्रवास करने वाले व्यक्तियों को भारत का नागरिकता प्रदान करता है। यह उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ उदाहरण
  • एक व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ था, लेकिन बाद में भारत लौट आया, वह अनुच्छेद 7 के खंड (1) के तहत भारत का नागरिक होगा।
  • एक व्यक्ति जो 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान स्थानांतरित हुआ था, लेकिन बाद में भारत लौट आया और भारत में कम से कम 6 महीने तक निवास कर रहा है, वह अनुच्छेद 7 के खंड (2) के तहत भारत का नागरिक होगा।
 भारत के संविधान के अनुच्छेद 8 के अनुसार, रोजगार, विवाह और शिक्षा के प्रयोजनों के लिए भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को भारत का नागरिक माना जाएगा।
विशिष्ट प्रावधान
  • भारतीय मूल: अनुच्छेद 8 के खंड (1) के अनुसार, भारत के बाहर रहने वाले कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है, भारत का नागरिक माना जाएगा।
  • रोजगार, विवाह और शिक्षा: अनुच्छेद 8 के खंड (2) के अनुसार, भारत के बाहर रहने वाले कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है और भारत में रोजगार, विवाह या शिक्षा के प्रयोजनों के लिए रहता है, भारत का नागरिक माना जाएगा।
महत्व
अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को भारत का नागरिकता प्रदान करता है। यह उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है, भारत का नागरिक है?
हाँ, भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है, अनुच्छेद 8 के तहत भारत का नागरिक है।
  • क्या भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है और भारत में रोजगार, विवाह या शिक्षा के प्रयोजनों के लिए रहता है, भारत का नागरिक है?
हाँ, भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है और भारत में रोजगार, विवाह या शिक्षा के प्रयोजनों के लिए रहता है, अनुच्छेद 8 के तहत भारत का नागरिक है।
विशेष प्रावधान के बारे में अधिक जानकारी
अनुच्छेद 8 के खंड (1) में कहा गया है कि भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है, भारत का नागरिक माना जाएगा। यह प्रावधान उन व्यक्तियों को कवर करता है जो भारत में पैदा हुए हैं या जिनके माता-पिता या दादा-दादी भारत के मूल निवासी हैं।
अनुच्छेद 8 के खंड (2) में कहा गया है कि भारत के बाहर रहने वाला कोई भी व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है और भारत में रोजगार, विवाह या शिक्षा के प्रयोजनों के लिए रहता है, भारत का नागरिक माना जाएगा। यह प्रावधान उन व्यक्तियों को कवर करता है जो भारत के मूल निवासी हैं और भारत में रोजगार, विवाह या शिक्षा के लिए रह रहे हैं।
अनुच्छेद 8 के महत्व
अनुच्छेद 8 भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को भारत का नागरिकता प्रदान करता है। यह उन व्यक्तियों को मान्यता देता है जो भारत के साथ ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध रखते हैं। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ उदाहरण
  • एक व्यक्ति जो भारत में पैदा हुआ है, लेकिन बाद में भारत से बाहर चला गया है, वह अनुच्छेद 8 के खंड (1) के तहत भारत का नागरिक होगा।
  • एक व्यक्ति जो भारत के मूल निवासी है और भारत में रोजगार के लिए रहता है, वह अनुच्छेद 8 के खंड (2) के तहत भारत का नागरिक होगा।
अनुच्छेद 8 के तहत नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया
अनुच्छेद 8 के तहत नागरिकता प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को निम्नलिखित चरणों को पूरा करना होगा:
  1. एक आवेदन पत्र भरें और इसे भारत के विदेश मंत्रालय को भेजें।
  2. अपने भारतीय मूल का प्रमाण प्रदान करें।
  3. भारत में रहने के इरादे का प्रमाण प्रदान करें।
अनुच्छेद 8 के तहत नागरिकता प्राप्त करने की समय सीमा
अनुच्छेद 8 के तहत नागरिकता प्राप्त करने के लिए कोई समय सीमा नहीं है। हालांकि, भारत सरकार आमतौर पर आवेदनों को 6 से 12 महीनों के भीतर संसाधित करती है।

अनुच्छेद 9: स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करने वाले लोग भारत के नागरिक नहीं होंगे

भारत के संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करता है, भारत का नागरिक नहीं होगा।
महत्व
अनुच्छेद 9 यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति भारत की नागरिकता का उपयोग किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करने के लिए नहीं करेगा। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या कोई व्यक्ति जो स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करता है, वह भारत का नागरिक है?
नहीं, कोई व्यक्ति जो स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करता है, वह भारत का नागरिक नहीं है।
  • क्या कोई व्यक्ति जो भारत की नागरिकता प्राप्त करता है, वह किसी अन्य देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है?
हाँ, कोई व्यक्ति जो भारत की नागरिकता प्राप्त करता है, वह किसी अन्य देश की नागरिकता भी प्राप्त कर सकता है। हालांकि, यदि वह स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो वह भारत का नागरिक नहीं रहेगा।
अनुच्छेद 9 के महत्व
अनुच्छेद 9 यह सुनिश्चित करता है कि भारत के नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करने के लिए अपनी भारतीय नागरिकता का उपयोग नहीं करेंगे। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ उदाहरण
  • एक व्यक्ति जो भारत में पैदा हुआ है और भारत का नागरिक है, वह स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त कर सकता है। हालांकि, ऐसा करने से वह भारत का नागरिक नहीं रहेगा।
  • एक व्यक्ति जो भारत में पैदा हुआ है और भारत का नागरिक है, वह किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर सकता है, लेकिन उसे पहले भारत की नागरिकता का त्याग करना होगा।
अनुच्छेद 9 के तहत नागरिकता का त्याग
अनुच्छेद 9 के तहत नागरिकता का त्याग करने के लिए, एक व्यक्ति को निम्नलिखित चरणों को पूरा करना होगा:
  1. एक आवेदन पत्र भरें और इसे भारत के विदेश मंत्रालय को भेजें।
  2. अपने भारतीय नागरिकता का प्रमाण प्रदान करें।
  3. अपने विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के इरादे का प्रमाण प्रदान करें।
अनुच्छेद 9 के तहत नागरिकता का त्याग करने की समय सीमा
अनुच्छेद 9 के तहत नागरिकता का त्याग करने के लिए कोई समय सीमा नहीं है। हालांकि, भारत सरकार आमतौर पर आवेदनों को 6 से 12 महीनों के भीतर संसाधित करती है।
 अनुच्छेद 11: संसद कानून द्वारा नागरिकता के अधिकार को विनियमित करेगी
भारत के संविधान के अनुच्छेद 11 के अनुसार, संसद को नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित किसी भी अन्य मामले में कोई भी प्रावधान करने का अधिकार है।
महत्व
अनुच्छेद 11 यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकता के अधिकारों को संसद द्वारा विनियमित किया जाएगा। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न
  • क्या संसद नागरिकता के अधिकारों को किसी भी तरह से विनियमित कर सकती है?
हाँ, संसद नागरिकता के अधिकारों को किसी भी तरह से विनियमित कर सकती है। इसमें नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति के लिए नए नियम बनाने और नागरिकता से संबंधित किसी भी अन्य मामले में प्रावधान करने की शक्ति शामिल है।
  • क्या संसद नागरिकता के अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त कर सकती है?
नहीं, संसद नागरिकता के अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर सकती है। संसद को हमेशा कुछ नागरिकता के अधिकारों को बनाए रखना होगा।
अनुच्छेद 11 के महत्व
अनुच्छेद 11 यह सुनिश्चित करता है कि नागरिकता के अधिकारों को संसद द्वारा विनियमित किया जाएगा। यह प्रावधान भारत के एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी मदद करता है।
अनुच्छेद 11 के तहत नागरिकता के अधिकारों के विनियमन के कुछ उदाहरण
  • संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 अधिनियमित किया है, जो नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति के लिए नियम निर्धारित करता है।
  • संसद ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 पारित किया है, जो नागरिकता के अधिग्रहण के लिए नए नियम स्थापित करता है।
अनुच्छेद 11 के तहत नागरिकता के अधिकारों के विनियमन के कुछ संभावित प्रभाव
  • संसद द्वारा नागरिकता के अधिकारों के विनियमन से भारत में नागरिकता प्राप्त करने और खोने की प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है।
  • संसद द्वारा नागरिकता के अधिकारों के विनियमन से भारत में नागरिकता के मुद्दों पर बहस बढ़ सकती है।
भारत में नागरिकता संविधान के भाग 2 के अनुच्छेद 5 से 11 द्वारा शासित होती है। इन प्रावधानों के अनुसार, भारत के नागरिक वे व्यक्ति हैं जो निम्नलिखित में से किसी एक श्रेणी में आते हैं:
  • जन्म से नागरिक: भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति, यदि उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक है, तो वह भारत का नागरिक है।
  • वंश से नागरिक: भारत के मूल निवासी के रूप में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति, भले ही वह भारत में पैदा न हुआ हो, वह भारत का नागरिक है।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिक: कोई भी व्यक्ति जो भारत में कम से कम पांच वर्षों तक लगातार निवास करता है और भारत के संविधान के प्रति वफादारी की शपथ लेता है, वह भारत का नागरिक बन सकता है।
  • देशीयकरण द्वारा नागरिक: कोई भी व्यक्ति जो भारत सरकार द्वारा देशीयकृत किया जाता है, वह भारत का नागरिक बन जाता है।

नागरिकता अधिनियम, 1955

भारत की नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति के लिए नियम निर्धारित करता है। यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 द्वारा शासित होता है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता के अधिग्रहण के तरीके
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, भारत की नागरिकता निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त की जा सकती है:
  • संविधान के प्रारंभ में नागरिकता: जो लोग 26 नवंबर 1949 को भारत में अधिवासित थे, वे संविधान के प्रारंभ में नागरिकता के आधार पर स्वचालित रूप से भारत के नागरिक बन गए।
  • जन्म से नागरिकता: वे व्यक्ति जिनका जन्म 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद लेकिन 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ हो, वे भारतीय नागरिक हैं।
  • वंश के आधार पर नागरिकता: 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मा व्यक्ति भारतीय नागरिक है यदि जन्म के समय माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक था।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता: कोई भी व्यक्ति जो भारत में कम से कम पांच वर्षों तक लगातार निवास करता है और भारत के संविधान के प्रति वफादारी की शपथ लेता है, वह भारत का नागरिक बन सकता है।
  • देशीयकरण द्वारा नागरिकता: कोई भी व्यक्ति जो भारत सरकार द्वारा देशीयकृत किया जाता है, वह भारत का नागरिक बन जाता है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता के समाप्ति के तरीके
नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, भारत की नागरिकता निम्नलिखित तरीकों से समाप्त हो सकती है:
  • नागरिकता का त्याग: कोई भी व्यक्ति जो भारत की नागरिकता का त्याग करना चाहता है, वह संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार ऐसा कर सकता है।
  • नागरिकता के नुकसान: कोई भी व्यक्ति जो भारत की नागरिकता के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता है, उसकी नागरिकता खो सकती है।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान
  • जन्म के आधार पर नागरिकता: 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति भारतीय नागरिक हैं यदि माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हैं या यदि जन्म के समय माता-पिता में से एक भारतीय नागरिक है और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं है।
  • वंश के आधार पर नागरिकता: वंश के आधार पर नागरिकता केवल उन लोगों पर लागू होती है जो भारत के मूल निवासी हैं।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता: पंजीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को भारत में कम से कम पांच वर्षों तक लगातार निवास करना चाहिए और भारत के संविधान के प्रति वफादारी की शपथ लेनी चाहिए।
  • देशीयकरण द्वारा नागरिकता: देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को भारत सरकार द्वारा देशीयकृत किया जाना चाहिए।
नागरिकता अधिनियम, 1955 के कुछ संभावित मुद्दे
  • नागरिकता का मुद्दा: भारत में नागरिकता का मुद्दा एक जटिल और विवादास्पद मुद्दा है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि भारत को जूस सोलि के सिद्धांत को अपनाना चाहिए ताकि सभी भारत में जन्म लेने वाले लोग भारत के नागरिक बन जाएं। अन्य लोगों का मानना ​​है कि भारत को जूस सेंगुइनिस के सिद्धांत को बनाए रखना चाहिए ताकि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को संरक्षित किया जा सके।
  • अवैध प्रवासियों का मुद्दा: भारत में अवैध प्रवासियों का मुद्दा भी एक जटिल मुद्दा है। भारत सरकार अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

भारत में राष्ट्रीयता

भारत में राष्ट्रीयता ज्यादातर जूस सेंगुइनिस (रक्त के अधिकार से नागरिकता) का पालन करती है, न कि जूस सोलि (क्षेत्र के भीतर जन्म के अधिकार से नागरिकता) का। इसका मतलब है कि भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति केवल तभी भारत का नागरिक होता है यदि उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो।
भारत में नागरिकता के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान
  • जन्म से नागरिकता: भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति, यदि उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक है, तो वह भारत का नागरिक है।
  • वंश से नागरिक: भारत के मूल निवासी के रूप में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति, भले ही वह भारत में पैदा न हुआ हो, वह भारत का नागरिक है।
  • पंजीकरण द्वारा नागरिक: कोई भी व्यक्ति जो भारत में कम से कम पांच वर्षों तक लगातार निवास करता है और भारत के संविधान के प्रति वफादारी की शपथ लेता है, वह भारत का नागरिक बन सकता है।
  • देशीयकरण द्वारा नागरिक: कोई भी व्यक्ति जो भारत सरकार द्वारा देशीयकृत किया जाता है, वह भारत का नागरिक बन जाता है।
  • नागरिकता का त्याग: कोई भी व्यक्ति जो भारत की नागरिकता का त्याग करना चाहता है, वह संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार ऐसा कर सकता है।
भारत में नागरिकता के कुछ संभावित मुद्दे
  • नागरिकता का मुद्दा: भारत में नागरिकता का मुद्दा एक जटिल और विवादास्पद मुद्दा है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि भारत को जूस सोलि के सिद्धांत को अपनाना चाहिए ताकि सभी भारत में जन्म लेने वाले लोग भारत के नागरिक बन जाएं। अन्य लोगों का मानना ​​है कि भारत को जूस सेंगुइनिस के सिद्धांत को बनाए रखना चाहिए ताकि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को संरक्षित किया जा सके।
  • अवैध प्रवासियों का मुद्दा: भारत में अवैध प्रवासियों का मुद्दा भी एक जटिल मुद्दा है। भारत सरकार अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

भारतीय नागरिकता की समाप्ति

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार, भारतीय नागरिकता तीन तरीकों से समाप्त हो सकती है:
  • नागरिकता का त्याग: कोई भी भारतीय नागरिक, जो किसी दूसरे देश का नागरिक भी है, निर्धारित तरीके से एक घोषणा के माध्यम से अपनी भारतीय नागरिकता का त्याग कर सकता है। जब कोई पुरुष भारत का नागरिक नहीं रह जाता, तो उसका प्रत्येक नाबालिग बच्चा भी भारत का नागरिक नहीं रह जाता। हालाँकि, ऐसा बच्चा पूर्ण आयु प्राप्त करने के एक वर्ष के भीतर भारतीय नागरिकता फिर से शुरू करने के अपने इरादे की घोषणा करके भारतीय नागरिक बन सकता है।
  • नागरिकता की समाप्ति: यदि कोई नागरिक जानबूझकर या स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता अपना लेता है तो भारतीय नागरिकता समाप्त की जा सकती है।
  • वंचित करना: भारत सरकार कुछ मामलों में किसी व्यक्ति को उसकी नागरिकता से वंचित कर सकती है। लेकिन यह बात सभी नागरिकों पर लागू नहीं होती। यह केवल उन नागरिकों के मामले में लागू होता है जिन्होंने पंजीकरण, देशीयकरण, या केवल अनुच्छेद 5 खंड (सी) द्वारा नागरिकता हासिल की है (जो भारत में अधिवास के लिए प्रारंभ में नागरिकता है और जो सामान्य रूप से भारत का निवासी रहा है) संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले 5 वर्ष से कम)।

भारतीय मूल के व्यक्ति (पीआईओ) कार्ड

पीआईओ कार्ड एक विशेष प्रकार का वीजा है जो भारत के मूल के उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जो भारतीय नागरिक नहीं हैं। पीआईओ कार्डधारक भारत में लंबे समय तक रहने और काम करने के लिए पात्र होते हैं।
पीआईओ कार्ड के लिए पात्र होने के लिए, एक व्यक्ति को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए:
  • वह भारत का मूल निवासी होना चाहिए।
  • वह किसी भी देश का नागरिक होना चाहिए जो पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, चीन या अफगानिस्तान में से एक नहीं है।
  • वह भारत में कम से कम 5 वर्षों तक लगातार निवास कर चुका होना चाहिए।
भारत के विदेशी नागरिक (ओसीआई) कार्ड
ओसीआई कार्ड एक विशेष प्रकार का वीजा है जो भारत के उन पूर्व नागरिकों को प्रदान किया जाता है जो अब किसी अन्य देश के नागरिक हैं। ओसीआई कार्डधारक भारत में लंबे समय तक रहने और काम करने के लिए पात्र होते हैं।
ओसीआई कार्ड के लिए पात्र होने के लिए, एक व्यक्ति को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना चाहिए:
  • वह भारत का पूर्व नागरिक होना चाहिए।
  • वह किसी भी देश का नागरिक होना चाहिए जो पाकिस्तान या बांग्लादेश में से एक नहीं है।
  • वह भारत में कम से कम 5 वर्षों तक लगातार निवास कर चुका होना चाहिए।

 

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