भारतीय नृत्य कला : शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य

भारतीय नृत्य कला : शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य

भारतीय नृत्य कला एक समृद्ध और विविध परंपरा है जो देश की संस्कृति और इतिहास को दर्शाती है। भारतीय नृत्य को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य।
शास्त्रीय नृत्य
शास्त्रीय नृत्य एक विकसित और परिष्कृत नृत्य रूप है जो एक विशिष्ट तकनीक और सिद्धांतों का पालन करता है। शास्त्रीय नृत्य का उद्देश्य विभिन्न भावों और भावनाओं को व्यक्त करना है। भारत में आठ प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ हैं:
  • कथक – उत्तर भारत की एक नृत्य शैली जो हिंदू पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों पर आधारित है।
  • भरतनाट्यम – दक्षिण भारत की एक नृत्य शैली जो हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की पूजा के लिए की जाती है।
  • कथकली – दक्षिण भारत की एक नृत्य नाटक शैली जो हिंदू पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों को चित्रित करती है।
  • मणिपुरी – पूर्वोत्तर भारत की एक नृत्य शैली जो हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को समर्पित है।
  • ओडिसी – पूर्वी भारत की एक नृत्य शैली जो भगवान कृष्ण और देवी राधा की कहानियों को चित्रित करती है।
  • कुचिपुड़ी – दक्षिण भारत की एक नृत्य शैली जो हिंदू धर्म के देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को समर्पित है।
  • सत्रिया – उत्तर भारत की एक नृत्य शैली जो हिंदू धर्म के देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को समर्पित है।
लोक नृत्य
लोक नृत्य एक पारंपरिक नृत्य रूप है जो किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है। लोक नृत्य अक्सर त्योहारों, समारोहों और अन्य सामाजिक अवसरों पर किया जाता है। भारत में सैकड़ों लोक नृत्य शैलियाँ हैं, जिनमें से कुछ सबसे लोकप्रिय हैं:
  • गरबा – गुजरात का एक नृत्य जो नवरात्रि त्योहार के दौरान किया जाता है।
  • रास लीला – उत्तर भारत का एक नृत्य नाटक जो भगवान कृष्ण और गोपियों की कहानियों को चित्रित करता है।
  • फूलवारी – बिहार का एक नृत्य जो प्रेम और सौंदर्य को समर्पित है।
  • झाँसी की रानी – उत्तर भारत का एक नृत्य नाटक जो रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित है।
  • मदुरै कल्याणम – दक्षिण भारत का एक नृत्य नाटक जो भगवान शिव और देवी पार्वती की शादी का वर्णन करता है।
  • पौराणिक नृत्य – विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों पर आधारित नृत्य।
  • सामाजिक नृत्य – विभिन्न अवसरों और उत्सवों के लिए किया जाने वाला नृत्य।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश लोक नृत्य
अरुणाचल प्रदेश बुईया, छालो, वांचो, पासी कोंगकी, पोनुंग, पोपीर, बारडो छाम।
असम बीहू, बीछुआ, नटपूजा, महारास, कालिगोपाल, बागुरुम्बा, नागा नृत्य, खेल गोपाल, कानोई, झूमूरा होबजानाई।
आंध्रप्रदेश वीरानाट्यम, बुट्टा बोम्मलू (Butta Bommalu), भामकल्पम ( Bhamakalpam), दप्पू (Dappu), तपेता गुल्लू (Tappeta Gullu,), लम्बाडी (Lambadi,), धीमसा (Dhimsa), कोलट्टम (Kolattam)
कर्नाटक यक्षगान, हुट्टारी, सुग्गी, कुनीथा, करगा, लाम्बी।
केरल कूरावारकली (Kuravarkali)।
बिहार जट– जटिन (Jat-Jatin), पनवारिया, बिदेसिया।
गुजरात गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी जुरुन, भावई।
हरियाणा झूमर, फाग, डाफ, धमाल, लूर, गुग्गा, खोर, जागोर।
हिमाचल प्रदेश झोरा, झाली, छारही, धामन, छापेली, महासू, नटी, डांगी।
जम्मू कश्मीर रऊफ, हीकत, मंदजात, कूद डांडी नाच।
महाराष्ट्र लावणी, डिंडी (Dindi), काला (Kala), दहीकला दसावतार।
ओडिसा गोतिपुआ (Gotipua), छाउ, घुमूरा (Ghumura), रानाप्पा (Ranappa), संबलपुरी नृत्य।
पश्चिम बंगाल लाठी, गंभीरा, ढाली, जतरा, बाउल, छाऊ, संथाली डांस।
पंजाब भांगड़ा, गिद्दा, दफ्फ, धामल (Dhamal), दंकारा (Dankara)।
राजस्थान घूमर, गणगौर, झूलन लीला, कालबेलिया, छारी (Chari)।
तमिलनाडु कुमी, कोलट्टम, कवाडी अट्टम।
उत्तर प्रदेश नौटंकी, रासलीला, कजरी, चाप्पेली।
उत्तराखंड भोटिया नृत्य (Bhotia Dance), चमफुली (Chamfuli)और छोलिया (Chholia)
गोवा देक्खनी, फुग्दी, शिग्मो, घोडे, जगोर, गोंफ, टोन्या मेल (Tonyamel)
मध्य प्रदेश जवारा, मटकी, अडा, खाड़ा नाच, फूलपति, ग्रिदा नृत्य, सालेलार्की, सेलाभडोनी, मंच।
छत्तीसगढ़ गौर मारिया, पैंथी, राउत नाच, पंडवाणी, वेडामती, कपालिक, भारथरी चरित्र, चंदनानी।
झारखंड झूमर, जनानी झूमर, मर्दाना झूमर, पैका, फगुआ, मुंदारी नृत्य, सरहुल, बाराओ, झीटका, डांगा, डोमचक, घोरा नाच।
मणिपुर डोल चोलम, थांग टा, लाई हाराओबा, पुंग चोलोम, खांबा थाईबी, नूपा नृत्य, रासलीला।
मेघालय शाद सुक मिनसेइम, शाद नॉन्गरेम, लाहो।
मिज़ोरम छेरव नृत्य, खुल्लम, चैलम, च्वांगलाईज्वान, जंगतालम, सरलामकई/ सोलाकिया, तलंगलम।
नागालैंड रेंगमा ( Rengma), बांस नृत्य चंगी नृत्य (Changai Dance), आलूयट्टू (Aaluyattu)।
सिक्किम सिंघी छाम (Singhi Chaam) और याक छाम, तमांग सेलो (Tamang Selo), मारूनी नाच।
त्रिपुरा होजागिरी, गारिया, झूम।
लक्षद्वीप लावा, कोलकाली (Kolkali), परीचाकली (Parichakali)।
भारतीय नृत्य कला का महत्व
भारतीय नृत्य कला देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल एक मनोरंजक कला रूप है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है। भारतीय नृत्य कला लोगों को एक साथ लाता है और उन्हें अपने देश की संस्कृति और इतिहास के बारे में जानने में मदद करता है।
भारतीय नृत्य कला के लाभ
भारतीय नृत्य कला के कई लाभ हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
  • यह एक शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण गतिविधि है जो समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देती है।
  • यह एक रचनात्मक अभिव्यक्ति का रूप है जो लोगों को अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करता है।
  • यह एक सामाजिक गतिविधि है जो लोगों को एक साथ ला सकती है और सामुदायिक भावना को बढ़ावा दे सकती है।
  • यह एक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है जो लोगों को अपनी संस्कृति और विरासत के बारे में जानने में मदद कर सकती है।

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