भारतीय छात्रों ने अमेरिका में STEM प्रतियोगिता में बाजी मारी

भारतीय छात्रों ने अमेरिका में एसटीईएम प्रतियोगिता में बाजी मारी

 

अमेरिका के माध्यमिक स्कूलों के छात्रों के लिए होने वाली विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) प्रतियोगिता के अंतिम चरण में पहुंचने वाले 30 छात्रों में से 16 छात्र भारतवंशी हैं। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो भारत के एसटीईएम क्षेत्र में बढ़ती प्रतिभा और नवाचार को दर्शाती है।
इस प्रतियोगिता का नाम थर्मो फिशर साइंटिफिक जूनियर इनोवेटर्स चैलेंज (थर्मो फिशर जेआइसी) है। इसका उद्देश्य युवा विज्ञानियों, इंजीनियरों को भविष्य की बड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रेरित करना है।
300 छात्रों में से विज्ञानियों, इंजीनियरों और शिक्षकों की चयन समिति ने अंतिम चरण के लिए 30 छात्रों का चयन किया था। ये छात्र अगले महीने वाशिंगटन में फाइनल में प्रतिभा का प्रदर्शन कर 100,000 डालर से अधिक के पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।
भारतवंशी छात्रों ने प्रतियोगिता में कई अलग-अलग क्षेत्रों में अपने शोध और नवाचार प्रस्तुत किए हैं। इनमें शामिल हैं:
  • एक ऐसी तकनीक जो वायु प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकती है।
  • एक ऐसी दवा जो कैंसर का इलाज करने में मदद कर सकती है।
  • एक ऐसी प्रणाली जो ऊर्जा की खपत को कम करने में मदद कर सकती है।
इन छात्रों की उपलब्धियों से भारत को दुनिया भर में एसटीईएम क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह छात्रों को एसटीईएम क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भी प्रेरित करेगा।
भारतीय छात्रों की सफलता के पीछे के कारक
भारतीय छात्रों की इस सफलता के पीछे कई कारक हैं। इनमें शामिल हैं:
  • भारत में बढ़ती आर्थिक विकास।
  • सरकार द्वारा एसटीईएम शिक्षा पर जोर देना।
  • भारतीय माता-पिता का बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना।
इन कारकों से भारत में एसटीईएम क्षेत्र में प्रतिभा और नवाचार का विकास हुआ है। यह भारत को दुनिया भर में एक प्रमुख एसटीईएम केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहा है।

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