भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय

भगवान गौतम बुद्ध का जीवन परिचय

भगवान गौतम बुद्ध का जीवन एक अद्भुत और प्रेरणास्पद गति में बदल गया, और उनकी शिक्षाएँ और उनके दर्शन दुनिया के कई हिस्सों में फैली। उन्होंने मानव जीवन के दुखों का समाधान दिखाया और मानवता के लिए एक मार्ग प्रशस्त किया।
जन्म
563 ईo पूo
जन्म स्थान
लुम्बिनी ( रुम्मिनदेई )
बचपन का नाम
सिद्धार्थ
माता
महामाया
पिता
शुद्धोधन
पत्नी
यशोधरा
पुत्र
राहुल
गोत्र
गौतम
जन्म का प्रतीक
कमल
महाभिनिष्क्रमण ( गृहत्याग )
29 वर्ष की अवस्था में
ज्ञान प्राप्ति
निरंजना नदी तट पर उरुबेला में
उपदेश की भाषा
मागधी
प्रथम उपदेश ( धर्मचक्रप्रवर्तन )
ऋषिपट्टनम के मृगदाव में
प्रथम वर्षावास
सारनाथ के मूलगंधकुटी विहार में
अंतिम वर्षावास
वैशाली के वेलुवग्राम
मृत्यु ( महापरिनिर्वाण )
483 ईo पूo में कुशीनगर में

 

जन्म और बचपन
गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी नामक स्थान पर लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था, जो आजकल नेपाल में स्थित है। उनके पिता का नाम शुद्धोधन था, और मां का नाम माया था। उनका जन्म एक राजकुमारी के रूप में हुआ था, लेकिन उन्होंने राजा के पुत्र के नाते की शिकार नहीं की, और विश्वास की यह कहानी बदल दी।
गौतम के बचपन के दौरान, उनका पारिपर्ण आत्मा के मुद्दे पर गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने बचपन से ही दुखों और पीड़ा के बारे में सोचना शुरू किया, और वे चाहते थे कि मानव समुदाय के सभी लोग सुखमय और सांत्वना भरे जीवन जिएं।
बुद्ध का हृदय परिवर्तन 
बुद्ध के जीवन का यह महत्वपूर्ण पल, उनके हृदय में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। इस घटना के पीछे छिपे संदेश और महत्व को समझने के लिए हम बुद्ध के मार्ग के परिप्रेक्ष्य में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
बूढ़ा व्यक्ति: पहला दृश्य एक बूढ़े व्यक्ति का था, जिसने बुद्ध को बूढ़ापन, वृद्धि और मृत्यु की याद दिलाया। यह दर्शाता है कि जीवन का प्रमुख दुख मृत्यु है और यह दिखाता है कि बुद्ध किस प्रकार से मृत्यु के संदर्भ में आलोचनात्मक दृष्टिकोण बना रहे थे।
बीमार व्यक्ति: दूसरा दृश्य एक बीमार व्यक्ति का था, जिसने बुद्ध को रोग, दुख, और पीड़ा की अनुभव कराई। इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि दुख और बीमारी जीवन के अविच्छिन्न हिस्से हैं, और इस प्रकार के दुख से मुक्ति प्राप्त करने का मार्ग ढूंढने की आवश्यकता है।
अर्थी / मृत व्यक्ति: तीसरा दृश्य एक अर्थी या मृत व्यक्ति का था, जिसने बुद्ध को मृत्यु के अंधकार, मानवीय जीवन के अनिश्चय, और अनित्यता की याद दिलाई। यह दर्शाता है कि सभी मानव जीवन में मृत्यु का सामना करेंगे, और इस समस्या का समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।
सन्यासी (प्रसन्न मुद्रा में): चौथा दृश्य बुद्ध के नये स्वरूप को दर्शाता है, जो सन्यासी के रूप में था और प्रसन्न मुद्रा में ब्रह्माण्ड के अनंतता की ओर दिखाता है। इस सम्बन्ध में, हम देखते हैं कि बुद्ध ने सम्पूर्ण मानव समस्याओं का समाधान पाया और अपने आत्मा को आत्मा के साथ मिला दिया।
इन चार दृश्यों के माध्यम से, बुद्ध ने मनुष्य जीवन की सच्चाई और मानव दुख के स्रोत को समझाया और इसे परिवर्तित करने के मार्ग की ओर मार्गदर्शन किया। वे अपने अनुयायियों को दुख से मुक्ति पाने के लिए आदर्श और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जिससे हम सभी अपने जीवन में सुख, शांति, और सहयोग प्राप्त कर सकते हैं।
महाजनक जीवन
गौतम बुद्ध के जीवन की एक बड़ी घटना थी उनके महाजनक जीवन का आरंभ। उन्होंने अपने राजमहल और सुख-संवाद को छोड़ दिया ताकि वे जीवन के असली और अर्थपूर्ण मार्ग पर चल सकें। वे एक साधु बन गए और वनवास के दौरान भगवान की खोज में निकले।
गौतम बुद्ध का अनुषासन और ध्यान उनके जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से थे। वे सड़कों पर भटकते रहे और अपने विचारों पर ध्यान देने वाले थे। एक दिन, जब वे बोद़ि वृक्ष के नीचे बैठे थे, उन्हें अचानक बोधि (जागरूकता) प्राप्त हुई, और वे बुद्ध बन गए।
धर्म और उपदेश
गौतम बुद्ध ने अपने जीवन के इस नए अवसर पर अपने उपदेश का प्रसार किया। उन्होंने चार महासत्यों को प्रकट किया, जिनमें जन्म, बुद्धि, प्रमाण, और प्रतिक्रिया शामिल हैं।
उनका मुख्य सिद्धांत “आत्मा शांति” था, जिसका मतलब है कि हमें अपने आत्मा की शांति और मुक्ति की खोज में लगना चाहिए। उन्होंने भी महान दशक्रियावाद का प्रचार किया, जिसमें अहिंसा (हिंसा से परहेज) का महत्व था।
उन्होंने बुद्धियुक्ति, शांति, और करुणा के साथ जीने की उपदेश दी, और उनके शिष्यों के बाद उनकी शिक्षाएँ बौद्ध धर्म का आधार बन गई।
गौतम बुद्ध की शिक्षाएं
गौतम बुद्ध ने चार आर्य सत्य और आठ-अंग मार्ग की शिक्षा दी। चार आर्य सत्य हैं:
  • दुख
  • दुख के कारण
  • दुख से मुक्ति
  • दुख से मुक्ति के मार्ग
आठ-अंग मार्ग हैं:
  • सही दृष्टि
  • सही संकल्प
  • सही वाणी
  • सही कर्म
  • सही आजीविका
  • सही प्रयास
  • सही ध्यान
  • सही समाधि
गौतम बुद्ध ने यह भी सिखाया कि सभी प्राणी समान हैं, और सभी को दया और करुणा से व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सिखाया कि सभी प्राणी दुख से पीड़ित हैं, और दुख से मुक्ति प्राप्त करना संभव है।
गृहत्याग ( महाभिनिष्क्रमण ) 
इन्होंने राजमहल और अपनी वैवाहिक सुख सुविधाओं को छोड़कर 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग दिया। इस घटना को बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण कहा गया। गृहत्याग के बाद अनोमा नदी के तट पर अपना सर मुंडवाया और भिक्षु काषाय वस्त्र धारण किये। ये सर्वप्रथम अनुपिय नाम आम्र उद्यान में कुछ दिन तक रुके। वैशाली के समीप इनकी मुलाकात सांख्य दर्शन के विद्वान आचार्य अलार कलाम से हुयी। राजगृह के समीप इनकी मुलाकात धर्माचार्य रुद्रक रामपुत्र से हुयी। ये ही दोनों बुद्ध के प्रारंभिक गुरु थे। इसके बाद ये उरुबेला ( बोधगया ) गए जहाँ इन्हें कौडिन्य आदि पाँच साधक मिले।
ज्ञान की प्राप्ति 
6 वर्ष की अथक प्रयत्न और घोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की अवस्था में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के तट पर पीपल / वट ( बोधिवृक्ष ) के नीचे इन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुयी। उसी दिन से ये ‘तथागत‘ कहलाये जाने लगे। ज्ञान प्राप्ति के बाद ही ये गौतम बुद्ध नाम से प्रचलित हुए।
धर्मचक्रप्रवर्तन 
इन्होंने अपना पहला उपदेश ऋषिपट्टनम / मृगदाव ( सारनाथ ) में 5 ब्राह्मण सन्यासियों को दिया। इसी प्रथम उपदेश को बौद्ध धर्म में धर्मचक्रप्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।
महापरिनिर्वाण 
इनकी मृत्यु हिरण्यवती नदी के तट पर कुशीनारा में 483 ईo पूo 80 वर्ष की अवस्था में अतिसार के कारण हो गयी। इसे बौद्ध धर्म में महापरिनिर्वाण कहा गया।
गौतम बुद्ध का निर्वाण जीवन का समापन था, और उन्होंने अगले जन्मों के चक्र से मुक्ति प्राप्त की।
उनका योगदान
गौतम बुद्ध का योगदान मानवता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके उपदेश ने मनुष्यता को दुःखों के समाधान की दिशा में मार्गदर्शन दिया, और उनका धर्म, जिसे बौद्ध धर्म कहा जाता है, दुनियाभर में लाखों लोगों के जीवन को सुखमय और शांत बनाया है।
भगवान गौतम बुद्ध का जीवन और उनके उपदेश ने एक नई धार्मिक और दार्शनिक धारा की शुरुआत की, जो मानवता के लिए सहानुभूति, शांति, और आध्यात्मिक विकास की दिशा में एक मार्ग प्रशस्त करती है। वे महान धर्मगुरु थे, जिन्होंने जीवन के अर्थ और मानवता के लिए नेतृत्व किया, और उनका योगदान आज भी हमारे समाज में महत्वपूर्ण है।
उनकी शिक्षाएँ हमें दुखों के साथ कैसे जीना है और कैसे सबको सम्प्रेरित करने की जरूरत है, यह सिखाती हैं। उनके उपदेश ने हमें अपने आत्मा के साथ मेल करने की महत्वपूर्ण बातें सिखाई हैं, और उनका संदेश हमें दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रेरणा देता है।

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