त्रिसूची व्यवस्था : संघ सूची, राज्य सूची व समवर्ती सूची

त्रिसूची व्यवस्था : संघ सूची, राज्य सूची व समवर्ती सूची

 

त्रिसूची व्यवस्था, जिसे हिंदी में “Federal System” या “Federation” कहा जाता है, एक ऐसी शाषन व्यवस्था है जिसमें शक्ति और कार्यक्षेत्र किसी मायापांचिकता से बाँटा जाता है। इस व्यवस्था में देश का सार्वभौमिक शासनक्रम किसी केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच बाँटा जाता है। यह व्यवस्था देश के नागरिकों को विभिन्न स्तरों पर शासन और प्रशासन की सेवाएं प्रदान करती है।

त्रिसूची व्यवस्था

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में त्रिसूची व्यवस्था स्थापित की गई है। इसके तहत संघ सूची, राज्य सूची व संवर्ती सूची आती है।
त्रिसूची व्यवस्था में तीन प्रमुख सूचियाँ होती हैं:

संघ सूची (Union List):

संघ सूची में वे कार्यक्षेत्र शामिल होते हैं जिन पर केंद्रीय सरकार का पूर्वाधिकार होता है। उन कार्यक्षेत्रों में संघ सरकार के आलाकमन के तहत कानून बनाने और प्रबंधन करने का अधिकार होता है। उदाहरण के तौर पर, रक्षा, विदेश मामले, और मुद्रा नियंत्रण इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
संघ सूची में उन विषयों को रखा गया है जो राष्ट्रीय हित के हैं। इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। संघ सूची में कुल 97 विषय हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषय हैं:

संघ सूची (Union List) के विषय –

    • विदेशी मामले
    • रेडियो, टेलिविजन
    • डाकघर बचत बैंक
    • शेयर बाजार
    • बैंकिंग
    • बीमा
    • रक्षा
    • रेलवे
    • जनगणना
    • निगम कर

राज्य सूची (State List):

राज्य सूची में वे कार्यक्षेत्र शामिल होते हैं जिन पर राज्य सरकारों का पूर्वाधिकार होता है। इन कार्यक्षेत्रों में राज्य सरकारें कानून बना सकती हैं और उनका प्रबंधन कर सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, पुलिस, स्वास्थ्य, और कृषि इस सूची में शामिल हो सकते हैं।
राज्य सूची में उन विषयों को रखा गया है जो राज्यों के हित से संबंधित हैं। इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। राज्य सूची में कुल 66 विषय हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषय हैं:

राज्य सूची (State List) के विषय –

  • पुलिस
  • लोक व्यवस्था
  • लोक स्वास्थ्य
  • स्वच्छता
  • भूमि सुधार
  • प्रति व्यक्ति कर
  • कृषि
  • गैस
  • निखात निधि
  • रेलवे पुलिस
  • पंचायती राज
  • कारागार

समवर्ती सूची (Concurrent List):

समवर्ती सूची में वे कार्यक्षेत्र होते हैं जिन पर और संघ सरकार और राज्य सरकारों का पूर्वाधिकार होता है। यहाँ, दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं और प्रबंधन कर सकती हैं, लेकिन जब कोई संघ और राज्य कानून में विरोध होता है, तो संघ कानून को प्राथमिकता दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, शिक्षा, व्यापार, और विभिन्न औद्योगिक कार्यक्षेत्र समवर्ती सूची में शामिल हो सकते हैं।
संवर्ती सूची में उन विषयों को रखा गया है जिन पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती हैं। इन विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र या राज्य सरकारों में से किसी एक के पास हो सकता है। संवर्ती सूची में कुल 47 विषय हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख विषय हैं:

संवर्ती सूची (Concurrent List) के विषय –

  • आर्थिक योजना/नियोजन
  • योजना आयोग
  • आपराधिक मामले
  • जनसंख्या नियंत्रण व परिवार नियोजन
  • शिक्षा
  • वन
  • विद्युत
  • दण्ड प्रक्रिया
  • विवाह
  • विवाह-विच्छेद
  • सामाजिक नियोजन
  • गोद लेना

अपशिष्ट विषय –

केंद्र के अधीन होंगे, जैसे – अंतरिक्ष अनुसंधान।

अनुसूचियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य –

शिक्षा पहले राज्य सूची का विषय था। परंतु राज्य व केंद्र के लिए इसके समान महत्व को देखते हुए संविधान के 42वें संशोधन 1976 की धारा 57 के तहत इसे समवर्ती सूची में डाल दिया गया।
यह व्यवस्था देश की एकता और एकाधिकरण की दिशा में मदद करती है, साथ ही राज्यों को अपने स्वायत्तता और अपनी विशेषता के साथ विकास करने का अवसर भी प्रदान करती है।
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